उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बेलगाम अफसरों के सामने परिवहन मंत्री बौने पड़ गए हैं।
उनकी लाचारी का आलम यह कि उन्होंने संविदा कंडक्टर भर्ती घोटाले पर जांच बैठाई, पर अफसरों ने जांच के बाद मंत्री को ही रिपोर्ट नहीं भेजी।
इतना ही नहीं, भर्ती करने वाले क्षेत्रीय प्रबंधकों को फर्जी प्रमाण पत्र के जरिये भर्ती होने वाले संविदा कंडक्टरों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश भी जारी कर दिया।
मंत्री ने खुद बयां किया दर्द
यह लाचारी परिवहन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव ने खुद बयां की। सोमवार को समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने बताया कि जनप्रतिनिधियों ने शिकायत की, क्षेत्रीय भर्ती समिति की साठगांठ से एनसीसी, आईटीआई एवं पीआरडी के फर्जी प्रमाणपत्र के जरिये बड़े पैमाने पर संविदा कंडक्टरों की भर्ती हो चुकी और सिलसिला जारी है।
मंत्री ने बताया कि इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच में लखनऊ परिक्षेत्र सहित 10 से अधिक परिक्षेत्रों में फर्जी प्रमाण पत्रों से संविदा कंडक्टरों की भर्ती के मामले उजागर हुए।
उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी मीडिया के माध्यम से हुई, लेकिन जांच रिपोर्ट उन्हें ही नहीं भेजी गई, जबकि उन्हीं क्षेत्रीय प्रबंधकों संविदा कंडक्टरों पर मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया गया जिन्होंने भर्ती में नियोजित तरीके से लापरवाही बरती।
उन्होंने यह भी माना कि क्षेत्रीय प्रबंधकों को तमाम निर्देश देने के बाद भी ड्राइवर मनमाने ढाबे पर बस को खड़ी करते हैं, जिससे यात्रियों को महंगे रेट पर चाय सहित अन्य खाद्य सामग्री खरीदनी पड़ती है।
ड्राइवरों की इस मनमानी को देखते हुए प्रबंध निदेशक को हर रूट पर बेहतर ढाबा संचालकों से अनुबंध करने निर्देश दिया गया है।
अब तक नहीं मिली रिपोर्ट
उन्होंने यह भी कहा कि परिवहन विभाग को काफी पहले ही निर्देश दिया गया था कि प्रदेश में ऐसे प्वाइंट की पहचान की जाए, जहां सर्वाधिक दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन अब तक न रिपोर्ट मिली और न ही दुर्घटनाएं रोकने की पहल हो सकी।
उन्होंने प्रमुख सचिव बीएस भुल्लर को लखनऊ के आरटीओ एपी सिंह को डीजल टैंपो के गुपचुप तरीके से परमिट जारी करने के मामले में निलंबित करने का भी निर्देश दिया।