यूपी विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद भाजपा के खिलाफ महागठबंधन की कवायद तेज हो गई है। नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी विपक्षी एकता के पैरोकारों में शामिल हो गए हैं।
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सोमवार को उन्होंने दिल्ली में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। ममता बनर्जी ने सोमवार को दिल्ली में कांग्रेस, एनसीपी नेताओं और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से भी मुलाकात की।
तृणमूल कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि ममता आने वाले दिनों में मोदी सरकार के खिलाफ दिल्ली में रैली करने की योजना बना रही है। हालांकि ममता ने इन मुलाकातों को औपचारिक बताया है।
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दिलचस्प बात यह है कि ममता बनर्जी लालकृष्ण आडवाणी से भी मिलीं। नीतीश व केसी त्यागी ने दो दिन पहले ही सीपीएम और सीपीआई के नेताओं से मुलाकात की थी। जद यू नेता शरद यादव भी लगातार विपक्षी नेताओं के संपर्क में हैं।
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यूपी विधानसभा चुनाव में एक साथ लड़े थे सपा-कांग्रेस
अखिलेश यादव व राहुल गांधी
- फोटो : amar ujala
यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा गठबंधन करके चुनाव लड़े थे लेकिन बसपा और राष्ट्रीय लोकदल अलग चुनाव लड़े थे।
जनता दल यू के अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन बनाने का सुझाव दिया था लेकिन इसे किसी दल ने गंभीरता से नहीं लिया। लिहाजा, जद यू ने यूपी विधानसभा चुनाव में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा। चुनाव में सपा, कांग्रेस, बसपा, रालोद, सभी की गत बुरी हुई। भाजपा को तीन चौथाई बहुमत हासिल हुआ।
नीतीश का सुझाव विपक्षी दलों को अब याद आ रहा है। अब 2019 के लोकसभा चुनाव में एकजुट होकर जाने की तैयारी है। इसके लिए महागठबंधन बनाने की कवायद चल रही है।
इसमें सभी प्रमुख गैर भाजपा दलों को शामिल करने की योजना है। नीतीश और लालू प्रसाद के बाद महागठबंधन के लिए अखिलेश ने पहल की है।
प्रशांत किशोर तैयार कर रहे हैं भूमिका
प्रशांत किशोर
- फोटो : फाइल फोटो
महागठबंधन के लिए भूमिका बनाने का काम कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर कर रहे हैं। वह राजनीतिक दलों के बीच बातचीत का माहौल बना रहे हैं। अधिकतर विपक्ष दलों से उनकी बातचीत हो चुकी है।
दिल्ली नगर निगम के चुनाव में प्रचार के लिए आए नीतीश कुमार और केसी त्यागी ने दो दिन पहले सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और सीपीआई महासचिव डी राजा से मुलाकात की थी।
वामपंथी और जद यू नेताओं की कांग्रेस से बात हुई है। अखिलेश यादव की सोमवार को ममता बनर्जी से विस्तार से बातचीत हुई।
बसपा को साथ लेने की तैयारी
बसपा सुप्रीमो मायावती
- फोटो : amar ujala
महागठबंधन में बसपा को साथ लेने की तैयारी है। लोकसभा चुनाव में खाता नहीं खुलने और विधानसभा चुनाव में मात्र 19 सीटों तक सिमट जाने के बाद अन्य नेताओं की तरह बसपा सुप्रीमो मायावती को अहसास हो गया है कि भाजपा से अकेले दम पर निपटना संभव नहीं है।
जद यू समेत सभी दल यूपी में सपा-बसपा को महागठबंधन में शामिल करना चाहते हैं। ऐसी चर्चा है कि अखिलेश यादव व मायावती की शीघ्र मुलाकात हो सकती है।
इस पर जद यू के प्रमुख महासचिव केसी त्यागी का कहना है कि चुनाव से पहले विपक्षी दलों की व्यापक एकता की बात बार-बार कह रहे थे, लेकिन तब किसी ने तवज्जो नहीं दी, हमसे बात तक नहीं की। जद यू महागठबंधन का हिमायती है। मोदी के बाद नीतीश कुमार सबसे अनुभवी हैं। वे समाज के सभी वर्गों में स्वीकार्य हैं। हमने कभी उन्हें प्रधानमंत्री पद का दावेदार नहीं बताया लेकिन वे पीएम मैटीरियल जरूर हैं।
जहां एक तरफ भाजपा के खिलाफ महागठबंधन की कवायद चल रही है, वहीं समाजवादी नेता रघु ठाकुर ने सोमवार को लखनऊ में शिवपाल सिंह यादव से मिलकर समाजवादी ताकतों की एकता के अभियान पर चर्चा की।
शिवपाल ने कहा कि जल्द ही सभी समाजवादियों को एक मंच पर लाने का अभियान चलाया जाएगा। यह वर्ष लोहिया के महाप्रयाण की अर्द्धसदी का वर्ष है। हम सभी समाजवादियों को आत्ममंथन करना होगा कि लोहिया और समाजवाद की कसौटी पर कहां खड़े हैं। देश की समस्याओं का समाधान लोहिया के सिद्धांतों से ही संभव है।
लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के संस्थापक रघु ठाकुर ने कहा कि हमें लोहिया और समाजवाद को कर्म एवं आचरण में उतारना होगा, दूसरा कोई विकल्प और रास्ता नहीं है। इस अवसर पर वयोवृद्ध लोहियावादी नेता राजनाथ शर्मा, चिंतन सभा के अध्यक्ष दीपक मिश्र भी उपस्थित रहे।