उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि प्रदेश कृषि प्रधान राज्यों के लिए जल्द ही मिसाल बनेगा।
अखिलेश ने कहा कि प्रदेश के किसान जीजान से खेती कर रहे हैं और उनमें कुछ नए शोध व प्रयोग भी कर रहे हैं।
बकौल अखिलेश, 'राज्य सरकार मेहनतकश किसानों को बढ़ावा देगी और कृषि क्षेत्र में काम कर रहे वैज्ञानिकों की सलाह को ध्यान में रखकर ही भविष्य में योजनाएं बनाई जाएंगी।'
अखिलेश ने कृषि वैज्ञानिकों से भी अपील की कि वे किसानों तक अपने शोध को पहुंचाएं, ताकि उनका विश्वास नई तकनीक में बढ़े।
अखिलेश ने कहा कि मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार जैसे राज्य कृषि के क्षेत्र में काफी अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में भी सपा सरकार ने सिंचाई योग्य भूमि किसानों को मुहैया कराई है। यहां भी खेती में नित नए प्रतिमान गढ़े जा रहे हैं।
अखिलेश ने कार्यक्रम में मौजूद सरकार के लोगों से कहा कि इनोवेटिव तरीके से खेती कर रहे किसानों की पहचान कर उन्हें सहायता मुहैया कराने पर जोर देने की जरूरत है। कृषि को अनदेखा करना सही नहीं है।
अखिलेश ने एक किसान की कहानी भी सुनाई और बताया कि कैसे यह किसान पीली गाजर के उत्पादन में सबसे आगे चला गया। उन्होंने कहा, 'मुझे एक पत्रिका में इस किसान की कहानी पढ़कर आश्चर्य हुआ कि वह हमारे राज्य का ही है। यह और भी दिलचस्प बात थी कि यह किसान सेना से रिटारर्ड था और इतनी अच्छी खेती कर रहा था।'
अखिलेश ने ऐसे किसानों को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि कृषि को बढ़ावा देने के लिए शोध, मार्केटिंग और सेलिंग को खासा ध्यान में रखना होगा। यह जमाना इन्हीं का है और हमें भी इनका इस्तेमाल करना चाहिए।
अखिलेश ने यह भी बताया कि गन्ने की खेती में उत्तर प्रदेश अक्सर महाराष्ट्र जैसे राज्यों को भी पीछे छोड़ देता है, लेकिन इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। ऐसे में, मार्केटिंग बेहद जरूरी है ताकि जनता को पता चल सके कि सरकार क्या काम कर रही है।
अखिलेश ने इधर-उधर की तमाम बातें कीं, लेकिन मुजफ्फनर दंगों ने इस कार्यक्रम में भी उनका पीछा नहीं छोड़ा। सवालों की बारिश हुई तो उन्होंने कहा कि वह जल्द ही मुजफ्फरनगर का दौरा करेंगे।