फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मायावती से मिलने पहुंचे अखिलेश, सियासी हालात पर की चर्चा, जल्द तय होगा संयुक्त रैलियों का कार्यक्रम

Wed, 13 Mar 2019 11:06 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
विज्ञापन
मायावती से मिले अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार शाम बसपा सुप्रीमो से मुलाकात कर प्रदेश के सियासी हालात पर चर्चा की। उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए संयुक्त रैलियों समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। बैठक के दौरान कांग्रेस के प्रति तल्खी दिखाई पड़ी। 
विज्ञापन


हालांकि, अभी कोई फैसला नहीं हुआ है लेकिन ऐसे संकेत हैं कि रायबरेली व अमेठी सीट पर भी गठबंधन अपने उम्मीदवार उतार सकता है। मायावती इस बात से भी नाराज हैं कि प्रियंका गांधी वाड्रा मेरठ के अस्पताल में भर्ती भीम आर्मी के अध्यक्ष चन्द्रशेखर से मिलने गईं।

लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद अखिलेश यादव की मायावती से यह पहली मुलाकात थी। पश्चिमी यूपी में पहले, दूसरे और तीसरे चरण में अप्रैल महीने में ही चुनाव होने है। पहले चरण की 8 सीटों के लिए 18 अप्रैल से नामांकन पत्र भरने का काम शुरू हो जाएगा। इन सीटों पर 11 अप्रैल को वोटिंग होनी है। समय कम है, इसलिए गठबंधन की एकजुटता का संदेश देने के लिए मायावती व अखिलेश यादव संयुक्त सभाएं करेंगे। 
विज्ञापन
विज्ञापन

बैठक में जल्द ही रैलियों के कार्यक्रम को अंतिम रूप देने पर सहमति बनी। इससे पहले सपा व बसपा के साथ ही रालोद नेता जिला या लोकसभावार अलग-अलग सभाएं करेंगे। इनमें तीनों दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय कायम किया जाएगा ताकि वे एक-दूसरे को अपने वोट ट्रांसफर कर सकें। कई जिलों में इसकी शुरुआत हो चुकी है।ऐसा माना जा रहा है कि गठबंधन में सपा-बसपा के बीच सीटों के बंटवारे में कुछ संशोधन हो सकता है। एक-दो सीटों की अदला-बदली को लेकर भी चर्चा हुई है।

मायावती ने कांग्रेस के प्रति कड़े तेवर दिखाए हैं। मंगलवार को प्रियंका गांधी वाड्रा जब गुजरात में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक को संबोधित कर रहीं थी तो मायावती ने कांग्रेस से किसी भी राज्य में गठजोड़ की संभावना से इन्कार किया था। अब उन्होंने यूपी में कांग्रेस के प्रति और सख्त रुख कर दिया है। लोकसभा चुनाव से पहले मनोनयन की रेवड़ियां बांटने को लेकर उन्होंने बुधवार को ट्वीट कर प्रदेश की भाजपा सरकार के साथ मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार को भी घेरा। 

अखिलेश से बातचीत में उन्होंने कांग्रेस से दूरी बनाए रखने पर जोर दिया। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई है कि रायबरेली व अमेठी से प्रत्याशी उतारने पर क्यों न विचार किया जाए। गौरतलब है कि गठबंधन ने ये दोनों सीट कांग्रेस के लिए छोड़ी हैं। अखिलेश व मायावती के बीच करीब एक घंटा चली सीधी बातचीत में कई सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर भी चर्चा हुई ताकि सोशल इंजीनियरिंग का संदेश दिया जा सके। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें