एक ऐसे वक्त में जब देशभर में सिर्फ एक सवाल सबसे ऊपर है...मोदी को वोट दें या नहीं, अखिलेश यादव उनकी लहर के सामने चट्टान बनकर उभरने की कोशिश कर रहे हैं।
मोदी की ही तरह रोजाना कम से कम दो जनसभाओं को संबोधित कर अखिलेश मोदी को बराबर जवाब दने की कोशिश में हैं।
हाल ही में एक अंग्रेजी अखबार के दिए इंटरव्यू में अखिलेश ने मोदी को रोकने की योजनाओं, थर्ड फ्रंट और समाजवादी पार्टी पर लगने वाले तमाम आरोपों पर बात की।
अखिलेश यादव ने यह भी मान लिया कि उत्तर प्रदेश में भले ही मुख्यमंत्री केवल वही हों, लेकिन उन पर लगने वाले पांच सीएम का आरोप गलत नहीं है। पढ़िए, क्या है उनका तर्क...
क्या मोदी बन सकते हैं पीएम?
अखिलेश के सामने मोदी के बारे में सवाल आया तो उन्होंने कहा कि मोदी के लिए सबसे बड़ा दांव उत्तर प्रदेश है। उन्होंने कहा कि लखनऊ में राजनाथ लड़ें या फिर वाराणसी में खुद मोदी, इसका यूपी में कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ने वाला है।
बकौल अखिलेश, 'मुझे पूरी उम्मीद है कि इन दोनों सीटों के आसपास की ज्यादातर सीटें हमें भी मिलेंगी।'
अखिलेश के मुताबिक, यह पूरा प्रचार अभियान मोदी के झूठ और छलावे के इर्द गिर्द बुना गया है। वह सिर्फ शेर, भैंस और 56 इंच के सीने जैसी ऊल-जुलूल बातें करते हैं।
एक पीएम उम्मीदवार को चाहिए कि वो देश को अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में बताए। उसे विदेश नीति के बारे में बात करनी चाहिए, लेकिन वो ऐसा करेंगे क्यों? वो तो दूसरे देशों को खुश रखना चाहते हैं।
गुजरात मॉडल में कितना सच?
बकौल अखिलेश, 'मोदी जिस गुजरात मॉडल के बारे में कहानी बताते फिर रहे हैं, उसका कोई आधार नहीं है। यह मॉडल दरअसल धीरूभाई अंबानी और वहां के अन्य बड़े व्यापारियों की देन है।'
अखिलेश ने कहा कि वहां के लोगों की फितरत में शुमार है और इससे मोदी का कोई लेना देना नहीं है। लोगों ने मुझे बताया है कि गुजरात में औरतें सुरक्षित हैं।
मुझे यह भी पता चला है कि वहां औरतें नवरात्र के वक्त भोर होने तक सड़कों पर निडर गरबा खेल सकती थीं, लेकिन मोदी राज में 12 बजे रात तक की रोक लगा दी गई है।
अखिलेश के मुताबिक, इससे ही पता चल जाता है कि मोदी के राज में शासन और कानून का कितना राज है।
अगर मोदी बने पीएम तो...?
इस सवाल पर अखिलेश ने कहा कि मोदी के पीएम बनने के चांस बहुत कम है। यहां तक कि लालकृष्ण आडवाणी भी उन्हें महज इवेंट मैनेजर कहते हैं।
बकौल अखिलेश, 'मोदी भाजपा के नहीं, बल्कि संघ के प्रोडक्ट हैं और संघ का कोई भी व्यक्ति देश पर राज नहीं कर सकता।'
अखिलेश के मुताबिक, देश का प्रधानमंत्री ऐसे व्यक्ति को होना चाहिए जो दिल से धर्म निरपेक्ष हो और उसके विचार भी ऐसे ही हों।
अखिलेश ने एक बार फिर जोर दिया कि थर्ड फ्रंट से उन्हें काफी उम्मीदे हैं। उन्होंने कहा कि नेताजी ने शरद यादव, नीतीश कुमार और लेफ्ट से बात की है। ममता से भी अखिलेश को उम्मीदें हैं, लेकिन उन्हें नतीजे आने का इंतजार है।
वाराणसी के लिए सपा की कोई खास रणनीति?
बकौल अखिलेश, 'मोदी और वाराणसी के लिए सपा ने कोई खास योजना नहीं तैयार की है। वहां हमारी ताकत हमारे काडर, विकास कार्य और मजबूत प्रत्याशी से है।'
अखिलेश ने यह भी कहा कि अगर मोदी चायवाला कार्ड खेलकर वोट मांग रहे हैं तो हमारे पास भी उन्हें जवाब देने के लिए पानवाला है।
अब तक, यह तो साफ हो चुका है कि उन्हें इतिहास और भूगोल की जानकारी नहीं है। अब बनारसी पान उनका दिमाग खोल देगा। उन्होंने कहा कि बनारस में पान पर चर्चा कभी खत्म नहीं होती है।
यूपी में पांच सीएम के आरोप पर...
बकौल अखिलेश, 'जो सबकी सुनकर और सभी को साथ लेकर चलता है, उसके साथ ही ऐसा होता है। लोग तो यह कहते हैं कि यूपी में पांच सीएम हैं। लेकिन मैं पूछता हूं कि इसमें गलत क्या है।'
अखिलेश के मुताबिक, यह हमारी ताकत है कि हमारी सरकार को सटीक अंदाज में चलाने के लिए पांच बेस्ट दिमाग लग रहे हैं। खैर, वैसे भी ये दुनिया एक के साथ एक फ्री वाली है।
वह कहते हैं, 'यहां तक कि मोदी ने भी कहा है कि उन्होंने आडवाणी का हाथ थामकर राजनीति का सफर तय किया है। अगर कोई हमें रास्ता दिखा रहा है, तो उसमें गलत ही क्या है?'
आजम और मुलायम की बयानबाजी पर...
बलात्कार पर मुलायम के बयान का बचाव करते हुए अखिलेश ने कहा कि इस अपराध के लिए सख्त से सख्त कानून होना चाहिए, ताकि अपराधियों को उनकी गलती का अहसास हो।
बकौल अखिलेश, 'हालांकि, हमारे देश में ऐसे भी तमाम कानून हैं जिनका दुरुपयोग हो रहा है। इस पर बहस होनी चाहिए। पूरी दुनिया में फांसी की सजा पर बहस चल रही है। हमारे राम मनोहर लोहिया भी इस सजा के खिलाफ थे।'
आजम पर लबे चुनाव आयोग के प्रतिबंध पर अखिलेश ने कहा कि उन्हें अपनी सफाई देने का मौका मिलना चाहिए था। उनकी बात सुनी ही नहीं गई।
बकौल अखिलेश, 'अगर मैं बुलंदशहर के एक यादव गांव में जाकर कारगिल युद्ध में परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव की बात करूं तो क्या यह आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होगा?'