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आमने-सामने: पूर्व मंत्री बोले- मोदी सरकार ने काशी विश्वनाथ मंदिर को मॉल बना दिया, योगी के मंत्री बोले- चश्मा बदले विपक्ष

Wed, 08 Dec 2021 11:27 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

पांच बार के विधायक रहे पूर्व मंत्री अजय राय का कहना है कि विकास करवाने के नाम पर मोदी सरकार ने काशी विश्वनाथ मंदिर को शॉपिंग मॉल बना दिया है। वहीं, वाराणसी मंडल के जिलों को विकास के नाम पर सिर्फ झांसा दिया गया है।
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पूर्व मंत्री अजय राय व योगी सरकार में मंत्री रवींद्र जायसवाल। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पूर्व मंत्री अजय राय का कहना है, वाराणसी मंडल को विकास के नाम पर सिर्फ झांसा मिला है। पांच बार विधायक रहे पूर्व मंत्री अजय राय 2022 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर भाजपा के खिलाफ ताल ठोकने को तैयार हैं। उनका कहना है, प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के बाद भी वाराणसी और मंडल के लोगों को विकास के नाम पर सिर्फ झांसा दिया गया। काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के नाम पर मंदिर परिसर को मॉल बना दिया गया। काशी के पुरातन स्वरूप को तहस-नहस कर दिया गया। पेश है अजय राय से हुई बातचीत के प्रमुख अंश...

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सवाल - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांसद बनने के बाद वाराणसी के विकास में कितना बदलाव आया?
जवाब -
वाराणसी पहले भी बदहाल थी, आज भी है। शहर के भीतरी क्षेत्र में जाम की समस्या से लोगों का जीना दूभर हो गया है। प्रधानमंत्री और प्रदेश सरकार में तीन मंत्री होने के बाद भी वाराणसी जिले का यह हाल है। हल्दिया से प्रयागराज के बीच गंगा में मालवाहक पोत के संचालन और बंदरगाह के निर्माण के लिए जो मशीनें खरीदी गईं, वह जंग खा रही हैं। यह परियोजना सफेद हाथी बन गई है। करीब 12 हजार करोड़ की यह परियोजना पिछले 7-8 सालों से लटकी पड़ी है। यही स्थिति ट्रेड      फैसिलिटी सेंटर की है। इसका निर्माण वाराणसी की सिल्क, बुनकरी, दस्तकारी के कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए किया गया था, लेकिन इसका उपयोग सिर्फ भाजपा और संघ के कार्यक्रमों के लिए किया जा रहा है।

सवाल - काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के निर्माण को किस नजरिये से देखते हैं?
जवाब -
इस क्षेत्र की पहचान एक मंदिर के तौर पर होती थी, लेकिन केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार ने इसे मंदिर के स्थान पर मॉल का स्वरूप दे दिया है। इस कॉरिडोर के निर्माण के नाम पर काशी के पुरातन स्वरूप को ही नष्ट नहीं किया गया, बल्कि कॉरिडोर के निर्माण के लिए उन तमाम मंदिरों को भी नेस्तनाबूद कर दिया गया जिनका काशी के कालखंड में अपना महत्व था। काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर और आसपास स्थित अति प्राचीन शनिदेव मंदिर, पार्वती मंदिर, अविमुक्तेश्वर महादेव मंदिर और देश के तीन में से एक रहे अक्षय वट वृक्ष का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। भाजपा अगर इसे विकास मानती है तो माने, पर हमारी नजर में सरकार का यह विनाशकारी कदम है।
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सवाल - पूरे मंडल में विकास की कैसी तस्वीर आप देखते हैं?
जवाब -
भाजपा के सांसद व विधायक विकास का ढिंढोरा तो पीट ही रहे हैं। पूर्वांचल में लोगों की चिकित्सा के लिए बीएचयू एक प्रमुख संस्था है। केंद्र सरकार ने बड़ी जोर-शोर से इसे एम्स का तमगा देने की घोषणा की। एम्स दिल्ली के निदेशक ने यहां आकर एमओयू भी किया, पर इससे चिकित्सा सुविधाओं में इजाफा नहीं हुआ। पहले की व्यवस्था भी बदहाल हो चुकी है। कैंसर के मरीजों के इलाज के लिए रेलवे के अस्पताल को टाटा को दे दिया गया, लेकिन सुविधाएं नहीं मिली। जांच के लिए अभी भी सैंपल मुंबई भेजे जाते हैं। यहां लैब तक नहीं बन पाई। गाजीपुर, जौनपुर और चंदौली के लोगों को भी विकास का झांसा देकर ठगा गया। इन सभी जिलों में हुए पुराने कामों को ही अपना बताकर काम चलाया जा रहा है। प्रधानमंत्री का क्षेत्र होने के बाद भी 8 साल में इस क्षेत्र में एक भी कल-कारखाना नहीं लगा। चंदौली में रेलवे ओवर ब्रिज पिछले पांच सालों से बन रहा है, सिर्फ कुछ पिलर ही खड़े हो पाए हैं।

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वाराणसी के शहर उत्तरी से विधायक और प्रदेश के स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल का कहना है कि मौजूदा सरकार ने राजनीति के बजाय सिर्फ विकास किया। इसलिए विपक्ष को यह खटक रहा है। मोदी व योगी सरकार के विकास अभियान से विपक्ष को मुद्दा नहीं मिल रहा है। इसलिए उसे विकास नहीं दिख रहा है। ऐसे में विपक्ष को अपना चश्मा बदलना चाहिए। वह पूर्वांचल के पिछड़ेपन के लिए पूर्ववर्ती सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हैं। पेश है रवींद्र जायसवाल से बातचीत के प्रमुख अंश...

सवाल - वाराणसी के विकास पर सवाल उठ रहे हैं?
जवाब -
सवाल वही लोग उठा रहे हैं, जिनकी सरकारों ने वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद भी पूर्वांचल की उपेक्षा की है। जबकि पूर्वांचल को लोग एक अघोषित राज्य के तौर पर मानते हैं। पूर्वांचल के अलावा मध्य प्रदेश, झारखंड और बिहार के लोगों के लिए चिकित्सा और शिक्षा का केंद्र होने के बाद भी पूर्व की सरकारों ने इस दिशा में काम नहीं किया। पहली बार किसी सरकार ने सिर्फ वाराणसी ही नहीं, पूरे पूर्वांचल के विकास पर फोकस किया है। वाराणसी को जाम से निजात दिलाने के लिए शहर के बाहरी इलाकों में रिंग रोड का निर्माण हो रहा है। वाराणसी-जौनपुर-सुल्तानपुर, वाराणसी-आजमगढ़, वाराणसी-मिर्जापुर होते हुए रीवा, वाराणसी-भदोही, वाराणसी-प्रयागराज और वाराणसी-गाजीपुर के बीच 4 व 6 लेन की सड़कें बनाई जा रही हैं। इससे पूर्वांचल के विकास को गति मिली। साथ ही लोगों के लिए रोजगार से अवसर पैदा हुए हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रयास की वजह से ही पिछले 5-7 वर्षों के दौरान वाराणसी समेत अन्य जिलों में सड़क शिक्षा, चिकित्सा और अवस्थापना सुविधाओं पर काम शुरू किया गया है।

सवाल - काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर से पुरातन स्वरूप को नुकसान होने के सवाल उठ रहे हैं?
जवाब -
कॉरिडोर से पुरातन स्वरूप को नुकसान नहीं हुआ, बल्कि कॉरिडोर बनने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। 1916 में वाराणसी आए महात्मा गांधी विश्वनाथ मंदिर और संकीर्ण गलियों में गंदगी देखकर विचलित हो गए थे और चिंता जताई थी। संकरी गलियों की वजह से बहुत से लोग विश्वनाथ मंदिर जाने से कतराते थे। तत्कालीन सरकार ने गांधी जी की चिंता को नहीं समझा। लेकिन मोदी सरकार ने गांधी जी की चिंता पर गौर करते हुए कॉरिडोर का निर्माण कराया है। सरकार की इस पहल से जहां काशी के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला है, वहीं यहां के लोगों के कारोबार में इजाफा हुआ है।

सवाल - पांच साल में कौन से ऐसे काम हुए हैं, जो सरकार की उपलब्धि है?
जवाब -
काशी हिंदू विश्वविद्यालय पूरे पूर्वांचल के अलावा बिहार, झारखंड और सीमावर्ती अन्य प्रदेश के लोगों के लिए चिकित्सा व शिक्षा के लिए बड़ा केंद्र है।  मोदी सरकार ने चिकित्सा सुविधा बढ़ाने के लिए जहां बीएचयू अस्पताल को एम्स का दर्जा दिया, वहीं बीएचयू को आईआईटी का दर्जा दिया गया।  कैंसर के मरीजों को होने वाली परेशानी को दूर करने के लिए भी सरकार ने उल्लेखनीय पहल किया है। मुंबई के टाटा कैंसर संस्थान के साथ मिलकर वाराणसी में स्थित रेलवे कैंसर संस्थान के अलावा बीएचयू कैंपस में भी कैंसर इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई है। हल्दिया-प्रयागराज से बीच जलपोत चलाने की योजना पर लगातार काम चल रहा है। वाराणसी के रामनगर के पास जहां बंदरगाह बन रहा है, वहां की जमीन लेने को लेकर कुछ मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं।
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