बाबरी ध्वंस की 22वीं बरसी भले ही अमन की ओट में सिमट गई हो, लेकिन धर्म पर सियासत और हक की लड़ाई में नए पैंतरों की आजमाइश जारी है।
एक ओर आगरा में धर्म परिवर्तन पर सियासत हो रही है तो दूसरी ओर अयोध्या के विवादित ढांचे पर नमाज पढ़ने के लिए बाबरी एक्शन कमेटी ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले इस मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से विचार-विमर्श करना चाहती है।
जहां कभी बाबरी मस्जिद हुआ करती थी, कमेटी उस जगह पर नमाज पढ़ने की इजाजत लेना चाहती है। लेकिन कमेटी को लग रहा है कि सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले लॉ बोर्ड से चीजें पुख्ता करना जरूरी है ताकि मामला शब्दावली की पेचदगी में न फंस जाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले को देखते हुए कि राम जन्मभूमि की विवादित जमीन का एक तिहाई हिस्सा मुस्लिमों का है, कमेटी ने हाल ही में उस जमीन पर कब्जा करने का प्रस्ताव बनाया है।
क्योंकि हिंदू भी तो कर रहे हैं पूजा
कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट से इस बात की दरख्वास्त की है कि उस एक-तिहाई भाग पर मुस्लिमों को नमाज पढ़ने की इजाजत दी जाए क्योंकि वहां हिंदुओं की पूजा लगातार जारी है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक और उत्तर प्रदेश के एडिशनल एडवोकेट जनरल जफरयाब जिलानी का कहना है कि इस प्रस्ताव पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कमेटी में बात की जाएगी।
एआईएमपीएलबी के एग्जिक्यूटिव मेंबर और लखनऊ ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महाली ने कहा, ‘हाईकोर्ट ने हमें जो हिस्सा दिया है, हमें उस पर जरूर विचार करना चाहिए। हम इस बारे में लॉ बोर्ड की मीटिंग में बात करेंगे।’
प्रमुख वादी मौलाना महफूजुर्रहमान के प्रतिनिधि खलीक अहमद खान ने बताया, ‘ये कदम सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखकर होगा क्योंकि अपने आदेश में कोर्ट ने ये माना है कि जब तक कोई दूसरा कोर्ट ऑर्डर नहीं आ जाता, मुस्लिमों को बबरी मस्जिद में नमाज पढ़ने का हक है। इसलिए जब तक कानूनी सुनवाई लटकी है तब तक ये हमारा अधिकार सुरक्षित रहेगा।