सीमैप के निदेशक प्रो. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने बताया कि पहले शुरुआती चरण की जांच में महीनों लग जाते थे। अब यही काम कुछ घंटों या दिनों में पूरा किया जा सकेगा। इससे कम उपयोगी यौगिकों पर महंगे प्रयोग करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। शोध का समय और लागत दोनों घटेंगे। नई दवाओं के विकास की रफ्तार बढ़ेगी।
हर्बल दवाओं को मिलेगा वैज्ञानिक आधार: एआई प्लेटफॉर्म के विकास का नेतृत्व करने वाले वैज्ञानिक अमन कौशिक ने बताया कि यह तकनीक आयुर्वेद और पारंपरिक औषधीय पौधों के वैज्ञानिक प्रमाण जुटाने में भी मदद करेगी।
जानिए सीमैप के बारे में: केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) लखनऊ में वर्ष 1959 में स्थापित वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की एक प्रमुख अनुसंधान प्रयोगशाला है। यह संस्थान मुख्य रूप से औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती, विकास और उनसे हर्बल उत्पाद बनाने की तकनीक विकसित करने पर कार्य करता है।