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UP: पीजीआई में खुलेगा एआई हेल्थ केयर सेंटर, जांच के साथ ही इलाज संबंधी निर्णय लेने में भी किया जाएगा इस्तेमाल

Wed, 18 Feb 2026 01:46 PM IST
ishwar ashish सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ

सार

एआई हेल्थ केयर सेंटर के निर्माण में 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका विकास पांच वर्ष में किया जाएगा जिसमें 10 लाख गीगाबाइट डाटा संग्रह करने की क्षमता होगी।
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पीजीआई लखनऊ - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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संजय गांधी पीजीआई आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) का इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में करेगा। इसके लिए संस्थान में अगले पांच साल की अवधि में 500 करोड़ रुपये की लागत से एआई हेल्थ केयर प्रोजेक्ट पूरी तरह से शुरू हो जाएगा।

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संस्थान की एकेडमिक काउंसिल से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इस पर काम भी शुरू हो गया है। इस सेंटर के माध्यम से विभिन्न बीमारियों की पहचान के साथ ही इलाज संबंधी निर्णय लेने में भी मदद मिलेगी। सेंटर पर अत्याधुनिक कंप्यूटर के माध्यम से विश्लेषण किया जाएगा।

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इसके लिए सेंटर पर 10 लाख गीगाबाइट डाटा संग्रह की व्यवस्था की जाएगी जिससे एआई की मशीन लर्निंग मजबूत होगी। यहां सालाना एक हजार चिकित्सीय पेशेवरों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

संस्थान के शासी निकाय ने स्वास्थ्य सेवा में एआई परियोजना के लिए सैद्धांतिक रूप से पहले ही मंजूरी दे दी है। संस्थान के टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ विभाग की ओर से इसका संचालन किया जाएगा।

जानिए कैसे काम करेगा एआई
एआई का सबसे ज्यादा इस्तेमाल पैथोलॉजी और इमेजिंग संबंधी जांचों में किया जा सकता है। इसके तहत संस्थान में हुई पूर्व की पैथोलॉजी और इमेजिंग संबंधी जांचों और रिपोर्ट को बड़ी क्षमता वाले कंप्यूटर पर स्टोर किया जाता है। इसके बाद जब भी कोई नई जांच की जाती है तो रिपोर्ट के लिए उसे एआई आधारित कंप्यूटर पर रन कराया जाता है। एआई आधारित कंप्यूटर सटीक तरीके से जांच के परिणाम बता देता है।

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इलाज में सटीकता ज्यादा, समय की बचत

एआई हेल्थ केयर की सबसे बड़ी विशेषता सटीकता और जांच में लगने वाले समय की बचत है। एक बार सिस्टम बन जाने के बाद इसकी लागत भी कम आएगी। जांच के बाद चिकित्सा संबंधी निर्णय लेने में भी एआई मददगार होगा। उदाहरण के तौर पर किसी सर्जरी का क्या परिणाम होगा या फिर कौन सी दवाई मरीज पर ज्यादा असर करेगी, एआई के इस्तेमाल से इसका आकलन किया जा सकता है। समय के साथ ही एआई खुद को और सक्षम बनाता रहेगा।

चार चरण में होगा काम
- पहला वर्ष: पायलट प्रोजेक्ट और शासन से मंजूरी
- दूसरा वर्ष सत्यापन और विशेषज्ञों की तैनाती
- तीसरा वर्ष जांच और इलाज की सेवाओं का 80 फीसदी तक विस्तार
- चौथा और पांचवां वर्ष : व्यवसायीकरण

पीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमान का कहना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल करने के लिए ही संस्थान में एआई हेल्थ केयर सेंटर की स्थापना की जा रही है। भविष्य में इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
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