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सुना है क्या: एआई माननीयों के लिए बना सिरदर्द, साथ ही 'ये कैसी जागरुकता और बिना खेले बन गए करोड़पति' के किस्से

Mon, 12 Oct 2026 08:58 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'एआई बना माननीयों के लिए सिरदर्द' की कहानी। इसके अलावा 'ये कैसी जागरूकता' और 'बिना खेले ही बन गए करोड़पति' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

एआई बना माननीयों के लिए सिरदर्द

इससे पहले चुनाव में सोशल मीडिया चुनौती था तो इस बार एआई माननीयों के लिए सिरदर्द बन गया है। उनकी समस्या असल से ज्यादा फर्जीवाड़े की सफाई देने से है। वैसे तो सभी इस आफत से जूझ रहे हैं लेकिन प्रदेश के तीन कद्दावर माननीयों के सामने एआई गले की फांस बन गया है। सोशल मीडिया में छवि को मलिन करने वाली तस्वीरें जबतक उनतक पहुंचती हैं, तबतक वायरल हो चुकी होती हैं। अब बेचारों के पास सफाई देने और काउंटर अटैक के सिवा कोई चारा नहीं। लेकिन असली की बात ही कौन सुनता है...अब अपने कह रहे हैं कि पलटवार तेज नहीं हुआ तो कुर्सी ही खतरे में पड़ सकती है।

ये कैसी जागरुकता

प्रदेश के पढ़ाई लिखाई वाले विभाग के हाल भी अजीब हैं। एक तरफ तो जिस दिन मुख्य उद्देश्य से छात्र बुलाए जाते हैं, उस दिन वो पूरा नहीं होता है। उल्टे छुट्टी के दिन शुरू हुए विशेष अभियान में फोटो औपचारिकता के लिए छात्रों को घर से बुला लिया जाता है। जल्दबाजी भी ऐसे की छात्र अपने घरेलू कपड़े में ही स्कूल पहुंच जाते हैं और औपचारिकता पूरी कर वापस चले जाते हैं। इस तरह विभाग का भी कोरम पूरा हो जाता है।

बिना खेले ही बन गए करोड़पति

किस्मत तो जापान एशियाई खेलों का हिस्सा बने यूपी के इस खिलाड़ी जैसी होनी चाहिए, जो बिना खेले ही करोड़पति बने। गस्टेड अफसर की नौकरी मिली सो अलग। जी हां, यह सच है। कुछ समय पहले तक इन महाशय की जापान एशियाई खेलों में खेलने की दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं थी, लेकिन एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के चोटिल होने के बाद उन्हें अचानक भारतीय टीम से बुलावा आया। एशियाई खेलों में भारत ने स्वर्ण जीता और पूरी प्रतियोगिता के दौरान बेंच पर बैठे रहने के बावजूद महाशय न सिर्फ करोड़पति बने, बल्कि सरकारी नौकरी भी तय हो गई।
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