श्रावस्ती। अहसान उल्ला ने फार्मेसी में डिप्लोमा किया है, लेकिन फार्मासिस्ट की जगह उसने पंचायत सहायक बनना पसंद किया। अधिक पैसों की लालच में उसने यूट्यूब व फेसबुक पर फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनाने का तरीका सीखने का प्रयास किया। इसी बीच वह पश्चिम बंगाल निवासी संजीव कुमार के संपर्क में आया, जिसने पैसे लेकर उसे आधार कार्ड बनाने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) का लिंक दिया। समझौता हुआ कि प्रति आधार कार्ड 250 रुपये संजीव को देने होंगे।
अक्तूबर 2024 से उसने आधार कार्ड बनाना शुरू किया। पुलिस के अनुसार अब तक 1200 आधार कार्ड बना चुका है। इनमें 300 नया व शेष आधार कार्ड संशोधित किए। एक आधार कार्ड के लिए अहसान उल्ला 800 रुपये लेता था, जिसमें से 250 रुपये संजीव कुमार व उसके बताए खाते में भेजता था। 250 से 300 रुपये प्रति आधार राशिद को देता था। शेष पैसे वह स्वयं रखता था।
आधार कार्ड बनाने में जाति व निवास प्रमाणपत्र बाधक न बने इसके लिए वह इन्हें भी बनाने लगा। इसके अलग से पैसे वसूलता था। पुलिस की जांच में पता चला है कि आरोपी ने श्रावस्ती के साथ ही बहराइच जिले के लोगों का भी फर्जी तरीके से आय, जाति व निवास प्रमाणपत्र बनाए हैं। नेपाल के लोगों का भी बड़ी संख्या में आधार कार्ड बनाया है।