लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रत्यायन परिषद (नैक)में ए प्लस प्लस ग्रेडिंग लाने के साथ ही नई कवायद शुरू की है। विवि अब अपना कृषि संकाय खोलेगा। जल्द ही शासन को 50 एकड़ जमीन का प्रस्ताव भेजा जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद औपचारिकताएं पूरी कर संचालन शुरू किया जाएगा।
लविवि में वर्तमान में कला, विज्ञान, प्रबंधन, लॉ, कॉमर्स, इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल साइंसेज संकाय हैं। वहां इनसे जुड़े विभिन्न कोर्सों की पढ़ाई होती है। वहीं, विवि से इस सत्र से जुड़े रायबरेली, लखीमपुर खीरी, सीतापुर व हरदोई जिलों के कॉलेजों में बीएससी-एमएससी एजी की पढ़ाई होती है। कुल डेढ़ दर्जन कॉलेजों में बीएससी-एमएससी एजी की पढ़ाई तो होती है, लेकिन विवि में इसका कोई संकाय नहीं है। कोर्स के सिलेबस अपग्रेड करने, पेपर बनाने से लेकर परीक्षा कराने आदि में समस्या आती है। वर्तमान में यह कोर्स विज्ञान संकाय के अंतर्गत चलाया जा रहा है। इसे लेकर भी खींचतान चलती रहती है। यही वजह है कि विवि प्रशासन अब इसका संकाय शुरू करेगा।
अभी तक सेकंड सेमेस्टर का कार्यक्रम नहीं
स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि एक तरफ जहां स्नातक दूसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू हो गई हैं और पीजी सेकंड सेमेस्टर की 10 सितंबर से शुरू हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अभी तक बीएससी-एमएससी एजी का परीक्षा कार्यक्रम भी नहीं जारी हो सका है। जानकारी के अनुसार, अभी परीक्षकों की तैनाती नहीं हो पाई है। इससे पेपर नहीं बने और परीक्षा की तैयारी पूरी नहीं की जा सकी है।
सेकंड कैंपस में अमृत सरोवर भी
कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने कहा कि शासन की ओर से अमृत सरोवर का विकास किया जा रहा है। हम शासन को प्रस्ताव देंगे कि हमारे सेकंड कैंपस स्थित तालाब को अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जाए। इससे शासन की मंशा भी पूरी होगी और उक्त तालाब का भी पुनरुद्धार हो सकेगा। इसके किनारे हमारा बायो डायवर्सिटी पार्क विकसित करने की योजना पर विवि पहले से काम कर रहा है। इसे भी जल्द मूर्त रूप दिया जाएगा।
विवि में भी हो सकेगी एजी की पढ़ाई
विवि ने एग्रीकल्चर फैकल्टी शुरू करने से संबंधित तैयारी शुरू की है। हम जल्द ही जमीन का प्रस्ताव शासन को देंगे। फैकल्टी खुलने से इससे जुड़े कोर्सों के संचालन में काफी सहूलियत होगी। विवि में भी इसकी पढ़ाई कराई जा सकेगी।
- प्रो. आलोक कुमार राय, कुलपति, लविवि