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काशी में मोदी को हराने के लिए दुश्मनों ने मिलाया 'हाथ'

Tue, 29 Apr 2014 05:32 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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वाराणसी से मोदी को हराने के लिए कांग्रेस का दांव सही बैठ गया है। काफी न नुकुर करने के बाद आखिरकार कौमी एकता दल ने कांग्रेस के अजय राय को समर्थन देने का एलान कर दिया है।
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वाराणसी से बड़ी खबर आ रही है नरेंद्र मोदी को हराने के लिए काशी में कौमी एकता दल ने कांग्रेस से हाथ मिला लिया है।

वाराणसी में एक प्रेस कांफ्रेंस करके कौमी एकता दल के अध्यक्ष अफजाल अंसारी ने एलान किया कि वे अजय राय का समर्थन करेंगे।

गौरतलब है कि अफजाल के भाई और माफिया मुख्तार अंसारी ने बीते दिनों काशी से अपना नाम वापस ले लिया था।

दिग्विजय ने फिक्स कराई डील?

अफजाल अंसारी ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ केंद्रीय नेताओं ने समर्थन के लिए बात की थी।

अफजाल ने दिग्विजय सिंह के नाम का खुलासा भी कर दिया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के नेताओं से बात करने के बाद हमने पार्टी में बात की और उसके बाद कांग्रेस के अजय राय को समर्थन देने का फैसला किया।

अफजाल ने इसकी वजह सांप्रदायिक ताकतों को दूर रखने की बताई। गौरतलब है कि पिछले दिनों अमर उजाला ने ऐसी ‌ही हलचल की ओर इशारा किया था।

मोदी को रोकने के लिए कैसे-कैसे हथकंडे

मोदी को रोकने के लिए हर पार्टी तमाम तरह के हथकंडे इस्तेमाल कर रही है। अफजाल के इस फैसले से पहले भी ‌बीते दिनों लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने ऐसा ही एलान किया था।

सुनील सिंह ने गुजरात दंगों को लेकर मोदी के ‌खिलाफ लड़ाई लड़ रही जाकिया जा‌फरी को काशी से लड़ाने की पेशकश की थी।

सुनील ने भी सांप्रदायिक ताकतों को दूर रखने का हवाला देते हुए सभी पार्टियों से जाकिया की उम्मीदवारी का समर्थन करने की बात कही थी।

यह भी खबर आई थी कि सपा से भी कांग्रेस ने प्रत्याशी हटाने की मांग की थी। ऐसा न होने पर कांग्रेस ने कौमी एकता दल से बात की।
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दुश्मन हुए एक, दिलचस्प हो गया मुकाबला

सियासत में कुछ भी जायज है...ये कहावत मोदी को हराने के लिए हो रही सियासत को देखकर सच दिखाई दे रही है।

बता दें कि मुख्तार अंसारी और अजय राय में पुरानी रंजिश मानी जाती है। अजय राय के बड़े भाई की हत्या के मामले में मुख्तार पर एफआईआर भी दर्ज की गई थी।

इसके बावजूद मोदी को हराने की कसक ने दो दुश्मनों को सियासत के मंच पर साथ खड़ा कर दिया है। मौजूदा सियासी ‌समीकरण काशी की ‌जंग को काफी दिलचस्प बना रहे हैं।

देखना यह है कि कौमी एकता दल के समर्थन के बाद मतदाताओं का रुख कैसा होता है।
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