लखनऊ। मेयर संयुक्ता भाटिया के घोटाले के आरोप के जवाब में नगर निगम के अधिकारियों ने नया फंड ही बना दिया है। मेयर के खिलाफ खोले गए इस मोर्चे के बाद नए फंड में एक ही दिन में 18 लाख रुपये भी जमा हो गए। शुक्रवार को नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी की मौजूदगी में बैठक हुई। इसमें मेयर के आरोप पर चर्चा के बाद तय हुआ कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नगर निगम के बजट से कोई पैसा खर्च नहीं किया जाएगा। नए कोविड-19 ऑफिशियल डोनेशन फंड में नगर निगम के अधिकारी ही योगदान देंगे। इसमें अभी एक-एक महीने की सैलरी अधिकारियों ने जमा की है। जरूरत पर और पैसा दिया जाएगा। खुद नगर आयुक्त ने 1.50 लाख रुपये फंड में दिए हैं। वहीं सभी अपर नगर आयुक्त, उप निदेशक पशु कल्याण, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, मुख्य अभियंता आदि ने सहयोग किया है। क्या था मेयर का आरोप मेयर ने आरोप लगाया था कि सैनिटाइजर बांटने के लिए 2 रुपये की बॉटल के लिए 10 रुपये में खरीद दिखाई गई। इससे नगर निगम की छवि खराब हुई है। 24 घंटे में नगर आयुक्त से कार्रवाई कर रिपोर्ट भी मेयर ने मांगी थी। सीएसआर फंड से मिली बॉटल उधर, नगर आयुक्त का कहना है कि अभी कोई खरीद नहीं की गई है। जिन 10 हजार बॉटल की खरीद की बात की जा रही है। उन्हें आरपीएम साइंटिफिक ने अपने सीएसआर फंड से बिना कोई कीमत लिए दान में दिया है। मेयर को आरोप लगाने से पहले सही तथ्य जानने चाहिए थे। अब कोरोना से लड़ाई में जरूरी मास्क, सैनिटाइजर आदि की खरीद 26 अधिकारियों के सहयोग से बने फंड से ही होगी। पहले भी कम्युनिटी किचन चलाने के लिए नगर निगम अधिकारियों ने अन्नदा फंड में 11.84 लाख रुपये जमा किए थे।