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Lucknow News: प्रदेश में गुजरात मॉडल पर बने एडवांस रीनल इंस्टीट्यूट

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पीजीआई में हुआ कार्यक्रम।
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लखनऊ। गुजरात में करीब तीन दशक पहले अहमदाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजीज एंड रिसर्च सेंटर और इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसप्लांटेशन साइंसेज की स्थापना की गई थी, जो आज देश के सबसे बड़े किडनी प्रत्यारोपण और शोध केंद्रों में शामिल है। प्रदेश में भी इसी तर्ज पर समर्पित रीनल इंस्टीट्यूट विकसित किया जाना चाहिए। जहां किडनी प्रत्यारोपण, डायलिसिस, इमरजेंसी और शोध की आधुनिक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हों। ये बातें बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी मेडिकल कॉलेज के निदेशक प्रोफेसर एसएन शंखवार ने कहीं। वह शनिवार को पीजीआई में नेफ्रोलॉजी विभाग के स्थापना दिवस समारोह में मौजूद रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक थे।
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प्रो. शंखवार ने कहा कि संस्थान के इमरजेंसी मेडिसिन एंड रीनल ट्रांसप्लांट सेंटर से इमरजेंसी सेवाओं को अन्य स्थान पर शिफ्ट कर इसे पूर्ण विकसित रीनल इंस्टीट्यूट के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसे एक ऑटोनॉमस इंस्टीट्यूट की तरह चलाया जाए। संस्थान का यह विभाग पूरे प्रदेश में किडनी के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कई राज्यों से यहां मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं।
नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. नारायण प्रसाद ने बताया कि उत्तर प्रदेश में हर वर्ष करीब 50 हजार मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है, लेकिन पूरे प्रदेश में केवल 500 से 700 प्रत्यारोपण हो पा रहे हैं। अंगदान को बढ़ावा देने और नए प्रत्यारोपण केंद्र विकसित करने की जरूरत है, ताकि ज्यादा मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
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प्रो. नारायण प्रसाद ने बताया कि संस्थान की टीम ने केजीएमयू, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में प्रत्यारोपण सेवाएं शुरू कराने में सहयोग दिया है। वहीं महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज, सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज और को भी प्रत्यारोपण की अनुमति मिल चुकी है। बताया अंगदान जागरूकता कार्यक्रम की वजह से कई साल बाद कैडेकर डोनेशन दोबारा शुरू हुआ है।
अंगदान सेवाओं को सुदृढ़ बनाए
मुख्य अतिथि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा प्रदेश में किडनी मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराया जा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में डायलिसिस की सुविधा शुरू हो गई है। इससे किडनी के गंभीर रोगियों को राहत मिली है। आईसीयू से लेकर सुपर स्पेशिलिटी सुविधाओं में इजाफा किया जा रहा है। किडनी ट्रांसप्लांट को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। हर वर्ष लगभग दो लाख भारतीय मरीज किडनी की बीमारी के कारण गंभीर अवस्था में पहुंचते हैं। इन मरीजों के लिए डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। सुपर स्पेशिलिस्ट डॉक्टर तैनात किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंगदान के प्रति जागरुकता बढ़ाई जा रही है। इसमें सभी की सहभागिता जरूरी है। एक ब्रेन डेड अपने अंगों से 8 लोगों को नया जीवन दे सकता है। जिन परिजनों ने दु:ख की घड़ी में ब्रेन डेड के अंग दान की प्रक्रिया पूरी कराई, मानवता हमेशा उनकी ऋणी रहेगी। अंगदान के प्रति प्रत्येक व्यक्ति सकारात्मक सोच विकसित करे। इससे हजारों लोगों को नया जीवन मिल सकता है। अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने अंगों की मांग और उपलब्धता के बीच बढ़ती खाई को कम करने हेतु समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। निदेशक डॉ. आरके धीमन ने प्रत्यारोपण सेवाओं को मजबूत करने में जागरूकता और संस्थागत सहयोग की परिवर्तनकारी भूमिका के बारे में बताया।
एक फीसदी भी अंगदान हो तो 480 किडनी व 240 लिवर प्रत्यारोपण संभव
प्रो. नारायण प्रसाद ने बताया कि प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग 24,000 सड़क दुर्घटना में मृत्यु होती हैं। यदि इनमें से केवल 1% मामलों में भी सफल मृत अंगदान हो सके, तो लगभग 480 किडनी प्रत्यारोपण तथा 240 लिवर एवं हृदय प्रत्यारोपण प्रतिवर्ष संभव हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त फेफड़े, अग्न्याशय, त्वचा, हड्डियां एवं अन्य ऊतक भी प्रत्यारोपण हेतु प्राप्त किए जा सकते हैं। अहमदाबाद स्थित आईकेडीआरसी के डॉ. विवेक कुटे ने गुजरात के सफल अंग प्रत्यारोपण मॉडल के अनुभव साझा किए। चेन्नई से आए डॉ. नटराजन गोपालकृष्णन, जो तमिलनाडु ट्रांसप्लांट अथॉरिटी के अध्यक्ष हैं, ने बताया कि तमिलनाडु देश में मृत अंगदान के क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है और वर्ष 2026 के पहले दो महीनों में ही वहां 57 मृत अंगदान हो चुके हैं।
वन विभाग का गेस्ट हाउस पीजीआई को मिलेगा
स्थापना दिवस समारोह में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने वन विभाग का गेस्ट हाउस पीजीआई को देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वह वन मंत्री से बात कर जल्द निर्णय लेंगे। इससे इलाज के लिये दूसरे राज्यों से आने रोगियों एवं तीमारदारों व पढ़ाई वाले छात्रों को सुविधा मिलेगी। उन्होंने संस्थान परिसर में 10 से 20 कमरे और करीब 200 लोगों की क्षमता वाला बैठने का कक्ष बनवाने का सुझाव दिया। केजीएमयू ट्रामा के जिम्मेदार सड़क हादसे के मृतक की सूचना पीजीआई को देंगे। ताकि ब्रेन डेड के परिजनों से मिलकर अंगदान की सहमति लेकर जरूरतमंद को अंग प्रत्यारोपण किया जा सके। अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष, निदेशक डॉ. आरके धीमान, यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. एम.एस. अंसारी डॉ. श्रुति टंडन, अहमदाबाद स्थित आईकेडीआरसी के डॉ. विवेक कुटे ने गुजरात के सफल अंग प्रत्यारोपण मॉडल के अनुभव साझा किए। उन्होंने इस मॉडल को उत्तर प्रदेश में लागू किये जाने का सुझाव दिया
इन्हें किया सम्मानित

डॉ. विजय खेर को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया। गुर्दा दान करने दो मृतक के परिजनों का सम्मानित किया। इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के सचिव डॉ. श्याम बंसल को विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा डॉ. एन. गोपालकृष्णन, ललिता रघुरामन, डॉ. विवेक कुटे,डॉ. अरविंद गुप्ता व रेजिडेंट, डॉ. यशेंदु सारडा, डॉ. सौर्य सौरभ मोहकुडा,डॉ. आकाश राय, डॉ. कृतिका गुप्ता के अलावा ब्रिजिंग द बॉन्ड पुरस्कार संतोष वर्मा को दिया गया।
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