राजनीतिक पार्टियों में आपराधिक व आर्थिक रूप से मजबूत लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी हैं। सभी दलों ने ऐसे लोगों को अपनाया है। यह कहना है चुनावी आंकड़ों पर काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स का। संस्था के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर चुनाव संबंधी आंकड़े और रिपोर्ट सामने रखी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के 34 एमएलए की आय में 300 गुना की वृद्धि दर्ज की गई।
बताया गया कि कई विधायकों की औसत संपति 2007 में एक करोड़ रुपये थी। वह 2017 में बढ़कर सात करोड़ रुपये हो गई है। साथ ही फिर से चुनाव लड़ते वालों की आय में करीब 60 गुना बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। प्रतिनिधियों ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर आप लखनऊ में एक छोटा सा फ्लैट भी बेचते हैं तो आयकर का नोटिस आता है। इनके खिलाफ कभी इनकम टैक्स का नोटिस क्यों नहीं आता है। वह भी तब, जब इनकी संपति इतनी तेजी से बढ़ रही है। इनके खिलाफ जांच क्यों नहीं होती। आखिर कानून तो सबके लिए एक जैसा ही है।
यह भी बताया गया कि उत्तर प्रदेश में जो चार प्रमुख दल हैं, चारों ने अपराधियों को अपनाया है। इन सबने उन्हीं को टिकट दिया है जो आर्थिक रूप से मजबूत थे। वहीं फिर से चुने गए विधायकों में देखा जाए तो 31 विधायकों की 2007 में औसत संपति 1.4 करोड़ थी। जो 2012 में जा कर 3.78 करोड़ हो गई। वहीं 2017 में यह संपति बढ़कर 7.74 करोड़ हो गई। खास बात यह है कि यह संपति उनके ही द्वारा घोषित की गई है।