निजी पॉलीटेक्निक संस्थानों में दाखिले की रफ्तार धीमी, 78 हजार सीटें अब भी खाली
लखनऊ। प्रदेश के निजी पॉलीटेक्निक संस्थानों में इस वर्ष भी दाखिले को लेकर संकट की स्थिति है। अब तक संपन्न तीन राउंड की काउंसिलिंग में केवल 9600 सीटों पर ही प्रवेश हो सका है, जबकि 78 हजार से अधिक सीटें अब भी रिक्त हैं। संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद के अनुसार, राज्यभर के 441 पॉलीटेक्निक कॉलेजों में काउंसिलिंग प्रक्रिया जारी है, जिनमें से 240 निजी संस्थान हैं।
इन संस्थानों में कुल 89 हजार से अधिक सीटें उपलब्ध हैं, परंतु प्रवेश की रफ्तार काफी धीमी है। बीते वर्ष की तरह इस बार भी छात्रों का रुझान राजकीय और अनुदानित संस्थानों की ओर अधिक देखा जा रहा है। परिषद के सचिव संजीव कुमार के अनुसार, सीट फीडिंग के दौरान छात्र प्राथमिकता से सरकारी संस्थानों को ही चुन रहे हैं। (संवाद)
फीस संरचना बनी बाधा
छात्रों के निजी संस्थानों से दूरी बनाने के पीछे फीस की खाई एक बड़ा कारण है। राजकीय पॉलीटेक्निक में किसी भी डिप्लोमा पाठ्यक्रम की फीस लगभग 12,000 रुपये है, जबकि निजी संस्थानों में यही फीस 30,000 रुपये से अधिक है। इसके अलावा हॉस्टल शुल्क समेत अन्य खर्च भी निजी कॉलेजों में कहीं अधिक हैं।
सीधे प्रवेश की छूट नहीं
निजी संस्थानों को सीधे प्रवेश (मैनेजमेंट कोटा) देने की छूट नहीं है, जिससे दाखिला प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है। परिषद को उम्मीद है कि चौथे राउंड में निजी पॉलीटेक्निक संस्थानों की स्थिति में कुछ सुधार हो सकता है, लेकिन पिछली प्रवृत्ति को देखते हुए यह संकट गहराता नजर आ रहा है।