लखनऊ। केजीएमयू से मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराने के मामले में संविदा डॉक्टर पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। आरोप है कि डॉक्टर ने मरीज को आयुष्मान कार्ड से मुफ्त इलाज का भरोसा देकर दुबग्गा स्थित निजी अस्पताल भेज दिया, जहां परिजनों से करीब एक लाख रुपये वसूले गए। जांच होने के बाद एक माह से केजीएमयू प्रशासन रिपोर्ट को दबाए हुए है। अब दोबारा जांच कराई जा रही है।
बस्ती के कुदरहा ब्लॉक निवासी पुष्पा (54) किडनी रोग से पीड़ित थीं। परिजन उन्हें केजीएमयू के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि संविदा पर तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर ने फेफड़ों में संक्रमण बताकर पाइप डालने की जरूरत बताई और केजीएमयू में प्रक्रिया में देरी का हवाला देकर नौ सितंबर को मरीज को फाह हॉस्पिटल भेज दिया। यहां आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद करीब एक लाख रुपये वसूले गए।
मरीज के बेटे विजय कुमार चौधरी ने डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। विभागाध्यक्ष ने डॉक्टर के बयान दर्ज कर रिपोर्ट कुलपति को भेज दी थी। हालांकि, आरोपी डॉक्टर ने निजी अस्पताल में मरीज का इलाज कराने के आरोपों से इन्कार किया था। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि मामले की फाइल दोबारा तलब की गई है। साक्ष्यों के आधार पर जांच कराई जा रही है। आरोप सही पाए जाने पर इसी सप्ताह कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।