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Lucknow News: अभिनय केवल संवाद नहीं, सच को जीना है...

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छात्रों से संवाद करते मुकेश छाबड़ा।
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लखनऊ। प्रख्यात फिल्म व कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने कहा कि अभिनय की शुरुआत सबसे पहले खुद को समझने से होती है। यह जानना जरूरी है कि आप कौन हैं, आपकी संवेदनाएं क्या हैं। अभिनय केवल संवाद बोलना नहीं, बल्कि सच को जीना है। थिएटर इस यात्रा का सबसे मजबूत आधार है। वे भारतेंदु नाट्य अकादमी की ओर से शीतकालीन कार्यशाला और अकादमी के नियमित पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए आयोजित मास्टर क्लास में विद्यार्थियों के सवालों के जवाब दे रहे थे।
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राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में रविवार को आयोजित इस मास्टर क्लास में मुकेश छाबड़ा ने व्याख्यान के बाद विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। ऑडिशन में सफल होने के एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि अक्सर कलाकार ऑडिशन में खुद बनने के बजाय किसी और की नकल करने लगते हैं। निर्देशक को नकल नहीं, सच्चाई चाहिए। ऑडिशन में आत्मविश्वास, तैयारी और ईमानदारी सबसे जरूरी तत्व हैं। एक छात्र ने सवाल पूछा कि क्या फिल्म में जाने के लिए थियेटर जरूरी है। उन्होंने कहा कि थियेटर अनिवार्य नहीं लेकिन बहुत उपयोगी है। रंगमंच अभिनेता को अनुशासन, धैर्य और गहराई देता है। कैमरे के सामने वही अभिनेता टिक पाता है जिसने मंच पर खुद को तपाया हो।

उन्होंने बताया कि रिजेक्शन इस प्रोफेशन का हिस्सा है। हर ‘ना’ आपको बेहतर बनने का मौका देता है। अगर आप सीखते रहेंगे, तो सही समय पर ‘हां’ जरूर मिलेगी। उन्होंने कहा कि अच्छा अभिनेता बनने के लिए देखने की आदत डालिए, सुनना सीखिए और जीवन को महसूस कीजिए। अच्छी किताबें पढ़िए, सिनेमा देखिए, लोगों को पढ़ना सीखिए। अभिनय जीवन का विस्तार है, उससे अलग नहीं। उन्होंने कहा कि छोटा शहर कभी कमजोरी नहीं होता। आपकी मिट्टी, आपकी भाषा और आपके अनुभव आपकी ताकत हैं। निरंतर अभ्यास ही आपको आगे ले जाएगा। इस अवसर पर अकादमी के अध्यक्ष डॉ. रतिशंकर त्रिपाठी, निदेशक बिपिन कुमार और रंगमंडल प्रमुख प्रिवेंद कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।

छात्रों से संवाद करते मुकेश छाबड़ा।

छात्रों से संवाद करते मुकेश छाबड़ा।

छात्रों से संवाद करते मुकेश छाबड़ा।

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