अपर मुख्य सचिव गृह ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए पूल टेस्टिंग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए क्योंकि पूल टेस्ट के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों की जांच करके कोरोना पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री योगी ने निर्देश दिए कि अस्पतालों में मौजूद कोरोना से सम्बन्धित तथा अन्य बायोमेडिकल वेस्ट का सुरक्षित डिस्पोजल किया जाये तथा सभी अस्पतालों में आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। कोरोना मरीजों का इलाज कोविड अस्पतालों में ही किया जाए तथा कोविड अस्पतालों में अनिवार्य रूप से सिर्फ कोविड संक्रमण का ही इलाज हो अन्य चिकित्सा गतिविधियां इन अस्पतालों में न की जाएं।
अपर मुख्य सचिव गृह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी ने कहा है कि कोरोना प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी को बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। अब तक इसके अच्छे परिणाम मिले हैं। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में निवासरत उत्तर प्रदेशवासियों को क्वारंटीन अवधि पूरी होने के उपरान्त चरणबद्ध तरीके से प्रदेश वापस लाने के निर्देश दिये।
सभी 19 संवेदनशील जनपदों के नोडल अधिकारियों से फीड बैक लेने और कोरोना के बढ़ते मामलों पर प्रभावी नियंत्रण करने के भी निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जिन औद्योगिक इकाइयों को चलाने की अनुमति दी गई है वहां सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। यह भी देखा जाए की इन इकाइयों में कोरोना की रोकथाम के सम्बन्ध में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा निर्देशों का अनुपालन अवश्य हो।
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि प्रदेश के 58 जिलों से अब तक 1843 कोरोना पॉजिटिव के मामले सामने आए हैं, जिसमें से 48 जिलों में 1525 मामले एक्टिव हैं। प्रदेश के 17 जिलों में कोरोना संक्रमण का कोई भी मामला सामने नहीं आया है और वर्तमान में 10 जनपद कोरोना संक्रमण से मुक्त हो गये हैं।
उन्होंने बताया कि अब तक 289 मरीज पूरी तरह से उपचारित हो चुके हैं। प्रदेश में अब तक लगभग 56 हजार लोगों के सैम्पल टेस्ट किये जा चुके हैं। 1601 लोगों को आइसोलेशन वार्ड में और 11,715 लोगों को फैसिलिटी क्वारेंटाइन में रखा गया है। उन्होंने बताया कि कोरोना पॉजिटिव पाये गये लोगों में 79.15 प्रतिशत पुरूष जबकि 20.85 प्रतिशत महिलाएं हैं।