एसिड अटैक में प्रीति राठी की मौत के मामले में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद ऐसे मामले कम होने की उम्मीद है। खासकर यूपी में जहां देश में सबसे ज्यादा एसिड अटैक होता है।
केस 1: स्मैक का नशा करने वाले ने पत्नी व बच्चो को दिया जिंदगी भर का दर्द
शाहजहांपुर की सबीना के पति वसीम को स्मैक की लत थी। 2014 में स्मैक के लिए पैसे को लेकर पत्नी से तकरार होने पर उसने बाल्टी भर तेजाब से सो रही सबीना और तीन बच्चों को जला दिया। 3 साल के सोहैल का पैर घुटनों तक गल गया तो 4 साल की मुस्कान की रीढ़ तक नजर आने लगी। सबसे बड़ी बेटी रानी का सीना झुलस गया।
सबीना का तो आधा चेहरा अब चेहरा नहीं रहा, ठोड़ी गरदन से चिपक गई। घटना के एक साल बाद सरकार से मदद के लिए लखनऊ बुलाया गया। मजदूर पिता ने कर्ज की व्यवस्था कर लखनऊ पहुंचाया। मगर 2015 में अंतिम समय में सहायता सूची से उसका नाम हटा दिया गया। आखिरकार 2016 में मदद मिल सकी।
केस 2: नाबालिग ने प्यार ठुकराया तो अधेड़ ने छीन ली रोशनी
बिजनौर के 55 साल के कपिल शर्मा ने पड़ोस की नाबालिग पर प्यार करने का दबाव डाला। बाल-बच्चेदार कपिल की घटिया सोच को भांप कर नाबालिग ने उसे दूर रहने की सलाह दी। यह कपिल को इतना नागवार गुजरा कि उसने नाबालिग को एसिड से जला दिया। पीड़िता की एक आंख की रोशनी चली गई।
दूसरी आंख की रोशनी भी कम हो गई। कहती है, ढाई साल में कई सर्जरियां हुईं, मगर मैं जानती हूं, अब पहले जैसी नहीं रहूंगी। सरकार ने उन्हें आर्थिक सहायता और इलाज की सुविधा दी है, लेकिन इलाज के चलते परिवार पर 5 लाख का कर्ज हो चुका है।