फैजाबाद में आचार्य नरेंद्र देव की ऐतिहासिक कोठी पर अवैध कब्जे के मामले में आखिरकार अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण की नींद टूट गई।
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अमर उजाला के 11 दिनों के अभियान के बाद कमिश्नर की सख्ती से दल-बल के साथ पहुंचे प्राधिकरण उपाध्यक्ष मंगलवार दोपहर 12 बजे आचार्य नरेंद्रदेव की कोठी पहुंचे। भारतीय पुरातत्व विभाग की आपत्ति के बाद बने अवैध रेस्टोरेंट व ऑडीटोरियम की बड़ी बिल्डिंग सील कर दी गई।
समाजवादी विचारक आचार्य नरेंद देव ने अपने पिता बल्देव जी की याद में ' बल्देव कोठी’ नाम से इमारत बनवाई थी, इस धरोहर को उनके बड़े भाई महेंद्रदेव ने वसीयत में सहेजने समेत कोठी में स्थित बड़ी पुस्तकालय को बनाए रखने की बात लिखी थी।
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फिर भी वर्तमान पीढ़ी के कुछ लोगों ने बेच डाला। खरीदार पिछले एक वर्ष से नौ लोगों का ज्वाइंट वेंचर बना इसे होटल की शक्ल देने लगे। इसका नक्शा विकास प्राधिकरण में जमा किया।
क्या है इस कोठी का महत्व
भवन की ऐतिहासिकता और हेरिटेज गुलाबबाड़ी से सन्निकटता को नजरअंदाज कर प्राधिकरण ने होटल के पक्ष में ग्राउंड जांच की रिपोर्ट भी तैयार कर ली थी। राजनीति के दिग्गजों से लेकर आध्यात्मिक जगत की विभूतियों का आना-जाना था।
आजादी के दौर में कोठी से आंदोलन की रणनीति बनाई जाती थी। यहां पर महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू आ चुके हैं। प्रयाग के आनंद भवन की तरह तत्समय की सियासी हस्तियों का यह महत्वपूर्ण ठौर था। डॉ. लोहिया, जेबी कृपालानी और सुचेता कृपलानी का भी इस कोठी से गहरा रिश्ता रहा।
इस कोठी पर अवैध कब्जे को लेकर भारतीय पुरातत्व विभाग ने सख्त रूख अपनाया। पहले फरवरी में रिपोर्ट दर्ज करने समेत उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा, फिर 5 सितंबर को दोबारा पत्र भेज नगर कोतवाली में होटल बना रहे नौ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट करने की मांग की।
बाद में प्राधिकरण को भी रोक लगाने व होटल का नक्शा अस्वीकृत समेत अवैध निर्माण ढहाने को लेकर पत्र लिखा। लेकिन प्राधिकरण कार्रवाई से बचता रहा। इसके पीछे कई सत्ता पक्ष के नेताओं का दबाव बताया गया। अमर उजाला में छपी खबर के बाद प्राधिकरण सचिव कंचन भारती की ओर से कमिश्नर समेत जिलाधिकारी आदि अफसरों को रिपोर्ट दी गई कि मौके पर जांच करने गए तो व्यापार मंडल के लोगों ने विरोध किया, भीड़ देख बगैर जांच व कार्रवाई किए लौट आए।
सोमवार को कमिश्रनर एसपी मिश्र के सख्त रूख के बाद मंगलवार को प्राधिकरण के सचिव राजेश कुमार ने दल-बल के साथ आचार्य नरेंद्रदेव की कोठी की जांच की। मौके पर चालीस गुणे पचास फीट में पक्का रेस्टोरेंट व ऑडीटोरियम बना मिला। इसके साथ ही कोठी से गुलाबबाड़ी की ओर से करीब दो सौ वर्ग फीट में प्लेटफार्म आदि बनाए गए थे। उपाध्यक्ष ने रेस्टोरेंट व ऑडीटोरियम भवन को सील कर दिया है। सख्त हिदायत दी कि कोई नव निर्माण नहीं होना चाहिए।
विकास प्राधिकरण में नक्शा स्वीकृत के लिए जो रिकार्ड पेश किए गए हैं, उसके मुताबिक इसका नक्शा संख्या ४१६/२०१५ है। राजस्व संख्या २७७१, २८७८ है तथा नजूल भूमि नंबर १५२५, १५२६, १५२७ व १५३२ है।
चक नंबर सात है तथा भवन संख्या ५/१७/३/२, ५/१७/३/१, ५/१७/३/३, ५/१७/३/४, ५/६/१४ और ५/१६/५ है। इसमें ५/१७/३/३ नया है। यह सभी राजस्व अभिलेख में रमना चाणक्यपुरी में है।
वल्लभ भाई पटेल के पुत्र विनोद कुमार पटेल, विनय कुमार पटेल और मुकेश पटेल तथा नैना.वी. पटेल पत्नी विनोद, अंजू.एम. पटेल पत्नी मुकेश, ज्ञान प्रकाश पुत्र हरीशलाल, इंद्र कुमार पुत्र स्व. बलदेव प्रसाद, श्रीमती वर्षा पत्नी ज्ञान प्रकाश और श्रीमती आरती पत्नी इंद्र कुमार ने अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण के पास होटल बनाने के लिए नक्शा स्वीकृत के लिए आवेदन किया था।