लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महिला वकील के साथ दुष्कर्म के मामले में पुलिस जांच में गंभीर खामियां पाते हुए, आरोपी वकील को अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी। कोर्ट ने टिप्पणी भी की कि मामले की विवेचना अत्यंत सतही और लापरवाह ढंग से की गई है।
न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश अभियुक्त वकील अतीकुल रहमान की अग्रिम जमानत अर्जी पर दिया। मामला वजीरगंज क्षेत्र का है। आरोपी अधिवक्ता पर दुष्कर्म, विवाह का झांसा देकर शारीरिक शोषण, ब्लैकमेलिंग, धन उगाही और धर्म परिवर्तन के दबाव जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़िता भी वकील है।
एफआईआर में आरोप है कि आरोपी ने वीडियो और फोटो के माध्यम से उसे धमकाया और पैसों की मांग की। यह भी आरोप है कि सिविल कोर्ट परिसर स्थित बहुमंजिला इमारत के आठवें फ्लोर पर ही अभियुक्त ने पीड़िता के साथ संबंध बनाया।
कोर्ट ने केस डायरी देखने के बाद पाया कि एफआईआर में कथित घटनाओं की तिथि, समय और स्थान स्पष्ट रूप से अंकित नहीं हैं, इसके अलावा, पीड़िता द्वारा जून 2024 से फोन कॉल के जरिये उत्पीड़न का आरोप लगाया गया, लेकिन पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड तक एकत्र नहीं किया। मेडिकल परीक्षण से भी पीड़िता ने इन्कार कर दिया था।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि विवेचक ने अपनी विवेचना में खोज के स्थान, मिले व्यक्तियों और ठोस साक्ष्यों का उल्लेख नहीं किया, जिससे पूरी जांच संदेह के घेरे में आ गई।