पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम की न्यायाधीश पूनम सिंह ने आरोपी को जुर्म स्वीकार करने पर बरी कर दिया है। आरोपी के खिलाफ 32 वर्ष तक मुकदमे की सुनवाई चली। मामला पीपरपुर थाने से जुड़ा है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक पीपरपुर थाने की पुलिस ने 24 जुलाई 1987 को दुर्गापुर रेलवे क्रॉसिंग की पटरियों को उखाड़ने के आरोप में कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। आरोपियों को पकड़ने के लिए दौड़ाने पर पुलिस टीम पर बम से जानलेवा हमला कर दिया गया था। इसी मामले में पुलिस ने फैजाबाद (अब अयोध्या) निवासी पल्लेदार राजाराम को भी आरोपी बनाया था।
आरोपी राजाराम ने मामले में गिरफ्तार होने के बाद जमानत कराई थी लेकिन बाद में वह फरार हो गया था। वह कानपुर में स्कूली बच्चों का रिक्शा चलाता था। पुलिस ने उसे भगौड़ा घोषित किया था।
पुलिस ने आरोपी राजाराम के परिवारीजनों पर उसे कोर्ट में पेश करने के लिए दबाव बनाया तो वह कोर्ट में हाजिर हो गया। आरोपी राजाराम ने मामले में खुद को निर्दोष बताते हुए अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम की न्यायाधीश पूनम सिंह ने आरोपी राजाराम के जेल में बिताई गई अवधि को सजा मानते हुए उसे बरी कर दिया।