लखनऊ। गोमतीनगर विस्तार थाने में जनवरी में दर्ज धोखाधड़ी, जालसाजी और साजिश रचने के मामले में मुख्य आरोपी तारा सिंह बिष्ट को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। वह गोमतीनगर विस्तार के विनीतखंड का निवासी है। पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ ले आई है। आरोपी भू माफिया बताया गया है।
एसओ गोमतीनगर विस्तार गौरव बाजपेयी ने बताया कि 21 जनवरी को विरामखंड निवासी वीरेंद्र कुमार सिंह ने तारा सिंह बिष्ट, पटेलपुरम निवासी अजय जायसवाल और विरामखंड निवासी राज नारायण सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि तारा सिंह बिष्ट ने दि हिमालयन सहकारी आवास समिति के उपाध्यक्ष के रूप में काम किया। उसने 12 जनवरी 1994 के अनरजिस्टर्ड बैनामे को आधार बनाया। शिवलाल की भूमि के कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए। फिर हरिजन को सवर्ण दर्शाते हुए 27 जून 1997 को राज नारायण सिंह के पक्ष में फर्जी बैनामा कराया। तारा सिंह और राज नारायण सिंह ने 21 अप्रैल 2023 को बहुजन निर्बल वर्ग गृह निर्माण समिति के अध्यक्ष अजय जायसवाल से मिलीभगत की। उन्होंने फर्जी एनओसी के आधार पर पीड़ित के भूखंड पर अवैध बिजली कनेक्शन भी लिया।
एसओ गोमतीनगर विस्तार ने बताया कि सर्विलांस की मदद से आरोपी तारा सिंह बिष्ट की लोकेशन नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में मिली थी। शुक्रवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद गोमतीनगर विस्तार पुलिस उसे शनिवार को लखनऊ ले आई। अजय जायसवाल और राज नारायण सिंह की भूमिका की जांच जारी है।
30 मुकदमे दर्ज, गैंगस्टर और जिलाबदर की कार्रवाई भी हो चुकी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, तारा सिंह बिष्ट पर 30 आपराधिक प्राथमिकी दर्ज हैं। ये प्राथमिकी गोमतीनगर, महानगर, चिनहट और हुसैनगंज थानों में दर्ज हैं। उसके खिलाफ वर्ष 2005 में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हुई थी। वर्ष 2007 में उसे जिलाबदर भी किया गया था। आरोपी पर दर्ज ज्यादातर मामले जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी के हैं।