पारा इलाके के रिंग रोड पर रविवार रात भांजे के दाह संस्कार में शामिल होकर वापस लौट रहे एक ही परिवार के पांच लोगों को बेकाबू डीसीएम ने कुचल दिया। हादसे में पति-पत्नी और उनके मासूम बेटे की की मौके पर मौत हो गई। जबकि गंभीर रूप से जख्मी दो लोगों को ट्रॉमा में भर्ती कराया गया है। दोनों की हालत नाजुक है।
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बिखर गया परिवार
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इसी बेकाबू डीसीएम से हुआ हादसा
- फोटो : amar ujala
हादसे के बाद आरोपी चालक डीसीएम छोड़कर भाग निकला। घटना से आक्रोशित लोगों ने रोड जाम करके पथराव किया। पुलिस ने लाठी फटकार कर भीड़ को खदेड़ा। पुलिस के मुताबिक, हरदोई चीनी मिल कॉलोनी निवासी सगे भाई राधे श्याम, राम किशोर व उनका बेटा आशीष (32), बहू रंजना (28) व कृष्णा (3) संग अपने भांजे डिप्टीखेड़ा निवासी अरुण के दाह संस्कार में शामिल होने आए थे।
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सड़क हादसा
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अंतिम संस्कार के बाद परिवार चारबाग स्टेशन जाने को निकला था। गांव से निकलते ही रिंग रोड पर सड़क पार करते वक्त बेकाबू डीसीएम ने पूरे परिवार को कुचल दिया।हादसे में आशीष और उसकी पत्नी रंजना व मासूम बेटे की मौके पर मौत हो गई। जबकि आशीष के पिता रामकिशोर व चाचा राधेश्याम गंभीर रूप से जख्मी हो गए।
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सड़क हादसा
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गनीमत रही कि राधेलाल की पत्नी पीछे छूट गई थी और वह बच गई। हादसे बाद आरोपी चालक डीसीएम छोड़कर भाग निकला। दर्दनाक हादसे में आशीष व उसका मासूम बेटा कृष्णा डीसीएम में फंसकर करीब सौ मीटर तक सड़क पर घिसटते चले गए।
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सड़क हादसा
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डीसीएम की रफ्तार तेज होने से वह अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराया। लोगों ने फंसे पिता-पुत्र को बाहर निकाला मगर दोनों की मौत हो चुकी थी। लोगों ने बताया डीसीएम की रफ्तार करीब सौ से अधिक थी। जिसके चलते यह हादसा हुआ। घटना से आक्रोशित लोगों ने रोड जाम करके डीसीएम फूंकने की कोशिश की। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने भीड़ को हटाया। भीड़ ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पथराव किया। बाद में पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करके भीड़ को खदेड़ा।
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सड़क हादसा
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इसके बाद पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर मॉर्च्युरी भेजा। एंबुलेंस बुलाकर जख्मी रामकिशोर व राधे श्याम को ट्रॉमा में भर्ती कराया। जहां दोनों की हालत नाजुक बनी है। घरवालों की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी चालक की तलाश में जुटी है।
ट्रॉमा में बेसुध पड़ी राधेलाल की पत्नी रामदेई होश में आने पर बार-बार बिलख रही थी। वह बोली कि आंखों के सामने ही चचेरे बेटे आशीष, बहू व पोते कृष्णा खून से लथपथ सड़क पर पड़े थे। सड़क पूरी खून से लाल हो गई थी। आशीष व रंजना की मौत बाद उसकी दोनों बेटियां अनाथ हो गईं। आशीष अपनी बेटियों को बहन के यहां छोड़कर आया था। आशीष पल्लेदारी करके घर का खर्च चलाता था।