लखनऊ। आयुर्वेद की स्वीकार्यता विदेश तक पहुंच रही है। ब्रिटेन के दरहम विश्वविद्यालय से लखनऊ आई जर्मनी की शोध छात्रा एरिका ने छह महीने के अध्ययन के आधार पर शोधपत्र प्रकाशित किया है।
इसमें उसने गठिया के इलाज में आयुर्वेद की उपयोगिता को स्वीकार किया है। यह अध्ययन वैज्ञानिक जर्नल एनल्स ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है।
आयुर्वेद पर तुलनात्मक अध्ययन के लिए एरिका एसजीपीजीआई में आधुनिक चिकित्सा तथा राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय का चयन आयुर्वेद चिकित्सा के लिए किया। शोध के दौरान पीजीआई में प्रो. यूसी घोषाल और गठिया विभाग के प्रमुख प्रो. संजीव रस्तोगी उनके मार्गदर्शक रहे। प्रो. संजीव राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय लखनऊ में स्थापित उत्तर प्रदेश के प्रथम आयुर्वेद गठिया उपचार एवं उन्नत शोध केंद्र के संस्थापक निदेशक के पद से हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं। अभी वे अपना समय आयुर्वेद से गठिया रोगियों के इलाज व शोध कार्य में दे रहे हैं।
70 फीसदी तक ठीक हुआ गठिया
एरिका ने 200 से अधिक रोगियों का साक्षात्कार किया। इसमें पाया कि गठिया रोगियों को आयुर्वेदिक उपचार से 70 फीसदी तक आराम मिल जाता है। यह राहत अमूमन दर्द की दवाओं के बगैर होती है। ज्यादातर रोगियों में लाभ स्थायी रहता है। वहीं, आधुनिक चिकित्सा पद्धति में गठिया में स्थायी आराम नहीं मिलता है।