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ABVP ने चेताया, लव जिहादियों से दूर रहें मुस्लिम!

Mon, 22 Sep 2014 01:16 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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इस्लाम में ‘जेहाद’ एक पवित्र शब्द माना गया है, पर कुछ लोग इसका उपयोग ‘लव जेहाद’ नाम से करके इस अपवित्र हरकतों को अंजाम दे रहे हैं।
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मुस्लिम समुदाय को ऐसे लोगों का बहिष्कार कर देना चाहिए। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आंबेकर ने रविवार को यहां परिषद के राष्ट्रीय छात्रा सम्मेलन व कार्यशाला के समापन सत्र में यह आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि ‘लव जेहाद’ महिला हिंसा का ही एक रूप है। राजनीतिक या धार्मिक रंग दिए बिना इसका समाधान किया जाना चाहिए। आंबेकर ने छात्रा प्रतिनिधियों से कहा कि वे अपने-अपने राज्यों में जाकर ‘लव जेहाद’ के मुद्दे पर लोगों को जागरूक करें।
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लड़कियों को मिले वाजिब भागीदारी

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ललिता कुमार मंगलम ने कहा कि महिला हिंसा के लिए केवल पुरुषों को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है। कई बार महिलाएं खुद भी इसमें योगदान देती हैं।

हाल ही दिल्ली में विवाहित स्कूली छात्रा को उसकी महिला प्रिंसिपल ने स्कूल आने से यह कहकर रोक दिया कि वह अन्य लड़कियों पर बुरा प्रभाव डाल सकती है। ऐसे मामलों पर सख्त प्रतिक्रिया देकर उसे नकारना चाहिए। एबीवीपी की उपाध्यक्ष ममता यादव, पवन चौहान और मनीष गुप्ता ने भी विचार रखे।

हाल ही में दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन की महासचिव चुनी गईं कनिका शेखावत ने कहा कि आज छात्राएं कॉलेज-यूनिवर्सिटी के मुद्दों पर सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रही हैं, पुलिस की लाठियां खा रही हैं, जेल जा रही हैं। ऐसे में उन्हें नेतृत्व में भी वाजिब भागीदारी हासिल करनी चाहिए।

दक्षिण भारत में ज्यादा ‘लव जेहाद’

आंध्र प्रदेश की हरिथा ने कहा कि केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में शादी करके जबरन धर्म परिवर्तन करवाने के मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं हालांकि ये दबाए-छिपाए जाते रहे।

उन्होंने हाल ही सामने आए मामलों के परिप्रेक्ष्य में कहा कि इनकी परिणति लड़की की हत्या के रूप में सामने आ रही है। पूरा दक्षिण भारत इससे प्रभावित है।

कार्यशाला के एक सत्र में छात्राओं को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के बारे में बताया गया। सॉफ्टवेयर इंजीनियर संजीव सिंह ने कहा कि आज सोशल मीडिया और इंटरनेट क्रांति की वजह से हर व्यक्ति के पास एक मीडिया के रूप में काम करने का विकल्प है। वरिष्ठ पत्रकार शिशिर द्विवेदी ने छात्राओं को बताया कि प्रिंट मीडिया आमजन तक पहुंच रखने और अपनी विश्वसनीयता के लिए जाना जाता है।
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संघर्षों की दास्तां सुना किया प्रेरित

इससे पहले कार्यशाला के पहले सत्र में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी भोपाल की डॉ. राका आर्या और दिल्ली हाईकोर्ट की वकील ज्योतिका कालरा ने छात्राओं को एफआईआर दर्ज करवाने से लेकर महिलाओं से संबंधित कानूनों की जानकारी दी।

दूसरे सत्र में संघ की तरफ से महिला मामलों की समन्वयक गीता ताई गुंडे ने बताया वे बतौर उद्यमी सफलतापूर्वक काम कर रही थीं लेकिन सामाजिक कार्यों से जुड़े बिना जीवन के प्रति अधूरापन महसूस करती थीं, इसलिए इनसे जुड़ीं। दिल्ली से आई उद्यमी ललिथा निझावन ने जीवन में सांस्कृतिक मूल्यों को महत्वपूर्ण बताया।

हैदराबाद की ऑडिटर सुहासिनी गोटमारे ने कहा कि उन्होंने कॉलेज एजूकेशन के बाद खुद को साहित्य, विज्ञान, दर्शन आदि पढ़ने में लगभग झोंक दिया और इस मुकाम पर पहुंचीं। ब्लेड रनर अरुणिमा सिन्हा ने बताया कि किस तरह हादसे में एक पैर गंवाने के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत वे माउंट एवरेस्ट फतह करने में सफल रहीं।
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