तुर्की में नृत्य करेंगे कथक नृत्यांगना
होरी, तराना के अलावा सूफियाना रंग और महादेव के तांडव स्वरूप को मंच पर नृत्य के माध्यम से उकेरती प्रस्तुतियाें के साथ बृहस्पतिवार को ‘रुनझुन’ का मंच सजा। कथक सीख रही नन्हीं उम्मीदों ने बड़ों के संग मंच पर कथक का रंग जमाया। दो घंटे से भी अधिक समय तक हाल में बैठे अभिभावक बच्चों का तालियां बजाकर उत्साहवर्धन करते रहे। राष्ट्रीय कथक संस्थान, लखनऊ की ओर से रवीन्द्रालय चारबाग में आयोजित ‘रुनझुन’ में 6 से 28 वर्ष तक के कथक कलाकारों की वार्षिक प्रस्तुति हुई। प्रस्तुति में लगभग 250 प्रशिक्षणरत कथक छात्र अपने कथक गुरुओं की देखरेख और संस्थान की सचिव सरिता श्रीवास्तव की परिकल्पना में मंच पर उतरे।
हुमा साहू की देखरेख में कथक का सुफियाना रंग मन कुन्तो मौला फवाजा अलि उन मौला पर नृत्य से समझाया कि जिसकी हिफ ाजत ऊपरवाला खुद कर रहा है, उसका इस दुनिया में कोई भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मंच पर प्रखर, ऐश्वर्या, रिदिमा, रिषिता, खेतान, दिशा, आकृति, समिक्षा, गौरांगी, तनिष्का केदल ने प्रस्तुति दी। सुर के घुंघरू बांध पैर में आज श्याम मैं नाचूंगी...पर कोमल, तनुजा, शिवानी, मेनका का दल उतरा। मदन दहन प्रस्तुति में शिव की तपस्या भंग करने पहुंचे रति-कामदेव प्रसंग को कथ के माध्यम से कलाकारों ने बरसते फूलों संग भाव दिए। प्रशिक्षिका उपासना श्रीवास्तव की देखरेख में मोनिका, सिमरन, प्रखर, ब्राह्मी, जाह्नवी, शिवांगी, मोनिसा, स्वर्निका, रविना, आदित्या के दल की प्रस्तुति हुई। डॉ. अलका निवेदन के मंच संचालन में तराना प्रस्तुति के बाद बीपीए, एमपीए एवं निपुण के छात्रों ने अर्धनारीश्वर प्रस्तुति में भगवान शिव के स्वरूप को दर्शाया। मंच पर अरोहिणी, स्वाती, कीर्ति, शिवानी, विकास, प्रखर उतरे। समारोह की आखिरी प्रस्तुति होरी रही..। मोनिका सिमरन केदल ने मेरो कान्हा जो आयो पलट के अबकी होली मैं खेलूगी डट के... पर तालियां पाई।