राज्य एकीकरण परिषद के उपाध्यक्ष आबिद खां ने इस्तीफा दे दिया है। मुख्यमंत्री को भेजे त्यागपत्र में उन्होंने राज्य में मुसलमानों से संबंधित मसले हल न होने पर नाराजगी भी जताई है।
कहा कि हुकूमत के रुख को देखते हुए अब हुकूमत के साथ बने रहना मुमकिन नहीं रह गया है। इसका खामियाजा आगामी लोकसभा चुनाव में भुगतना होगा। इसी साल चार जनवरी को आबिद को लालबत्ती से नवाजा गया था।
अपने आवास पर शनिवार को बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने इस्तीफे के बाबत जानकारी दी। 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री को भेजे त्यागपत्र की प्रति भी खबर नवीसों को दी।
आबिद ने बताया कि हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग के सलाहकार मौलाना तौकीर रजा खां ने मुस्लिम हितों से जुड़े जो मुद्दे उठाए हैं, उससे वह काफी हद तक सहमत हैं। लेकिन इन मुद्दों पर सपा सरकार ने अभी तक कोई गौर नहीं किया है।
इनमें बेगुनाह मुसलमानों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने, दंगा आयोग का गठन, सच्चर कमेटी की सिफारिशों को यूपी में लागू करने और पीसीएस जे में उर्दू का एक पर्चा रखने आदि की मांगें प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा कि इन मसलों पर ध्यान न दिए जाने से आम मुसलमान काफी नाराज है, जिसका असर लोकसभा चुनाव पर भी पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि इन हालात में हुकूमत के साथ काम करने में काफी मुश्किल आ रही हैं। मुख्यमंत्री या तो इन मुद्दों को हल करें या फिर त्यागपत्र स्वीकार करें।
आबिद ने बताया कि इस्तीफा स्वीकार होने की जानकारी चार दिन बाद भी उन्हें नहीं दी गई है। इसलिए मीडिया को यह जानकारी देने के साथ ही उन्होंने सरकारी गाड़ी और सरकार की ओर से मिले मुलाजिमों को वापस कर दिया है।