लखनऊ। हजरतगंज थाने में हुसैनगंज निवासी प्रशांत कुमार दुबे ने अलीगंज में चौधरी टोला के रहने वाले निखिल वर्मा व उसके गिरोह के खिलाफ 35 लाख की ठगी की एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस ने कार्रवाई एसीपी हजरतगंज विकास जायसवाल के आदेश पर की है। आरोपियों पर वीडीओ और समाज कल्याण पर्यवेक्षक की नौकरी का झांसा देने का आरोप है।
प्रशांत के मुताबिक वर्ष 2023 में हजरतगंज में उनकी मुलाकात निखिल से हुई थी। उसने खुद को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) कार्यालय में ओएसडी के यहां स्टोनो बताया था। आरोपी ने उनकी व भाइयों की नौकरी लगवाने की बात कही और 35 लाख रुपये मांगे। प्रशांत ने 23 जून 2023 से लेकर जनवरी 2025 तक रुपये और अपने दस्तावेज उसे दे दिए। इस बीच पता चला कि निखिल को पहले ही नौकरी से निकाला जा चुका है। कुछ दिन बाद उसने व उसके गिरोह के लोगों ने उनके व भाई के नाम पर नियुक्ति पत्र घर भेज दिए। समाज कल्याण विभाग के दफ्तर पहुंचने पर पता चला कि सभी नियुक्ति पत्र फर्जी हैं। उन्होंने निखिल से पूछताछ की तो वह टरकाने लगे। दबाव बनाने पर उसने धमकाना शुरू कर दिया। थक हारकर उन्होंने एसीपी से शिकायत की। इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने बताया कि पीड़ितों से दस्तावेज मांगे गए हैं। तफ्तीश में जो भी साक्ष्य सामने आएंगे उस आधार पर कार्रवाई होगी।
रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा देकर पांच लाख रुपये ऐंठे
मदेयगंज थाने में बलिया के तिखमपुर निवासी पंकज ने खदरा में रहने वाले दानिश अली के खिलाफ रेलवे में नौकरी लगवाने के नाम पर पांच लाख रुपये ऐंठने की एफआईआर दर्ज कराई है। पंकज के मुताबिक 2016 में वह लखनऊ में रहकर स्पोर्ट की तैयारी कर रहे थे। तभी उनकी पहचान दानिश से हुई। उसने उनकी रेलवे में नौकरी लगवाने की बात कही। इसके लिए आरोपी ने पांच लाख रुपये लिए। आरोप है कि तब से अभी तक दानिश उन्हें सिर्फ टरका रहा है। इंस्पेक्टर अंजनी कुमार मिश्र के मुताबिक मामले की तफ्तीश की जा रही है।