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Lucknow News: संस्थानों में जांच के लिए डेढ़ साल का लंबा इंंतजार, अस्पतालों में मशीन नहीं

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लखनऊ। सरकारी सिस्टम की सुस्ती बच्चों की सुनने की क्षमता पर भारी पड़ रही है। ब्रेनस्टेम इवोक्ड रिस्पांस ऑडियोमेट्री (बेरा) जांच के लिए अस्पतालों में हालात इतने बदतर हैं कि तारीख मिलने में एक से डेढ़ साल लग जा रहा है। कई अस्पतालों में तो मशीन तक मौजूद नहीं। सीएसआर फंड से खरीदी जानी वाली मशीन नौ महीने से फाइलों में दबी पड़ी है। नतीजा, बीमार बच्चे सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं और फिर बिना जांच के बिना लौटने को मजबूर हैं।
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केजीएमयू, लोहिया और पीजीआई में बेरा जांच उपलब्ध है, लेकिन यहां हालात चिंताजनक हैं। जांच के लिए एक से डेढ़ साल की वेटिंग है। मजबूरन परिजन निजी केंद्रों का रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें अधिक शुल्क देना पड़ रहा है। अस्पताल में सुविधा शुरू करने के लिए तत्कालीन सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल ने सीएसआर फंड से मशीन खरीदने का निर्णय लिया था। बलरामपुर अस्पताल में जगह भी तय कर दी गई थी, लेकिन नौ महीने बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ी। दूरदराज के जिलों से आने वाले बच्चों को बड़े केंद्रों पर भेजा जा रहा है, जहां दोबारा लंबी वेटिंग मिलने से परिजन या तो महीनों इंतजार कर रहे हैं या फिर महंगी निजी जांच कराने को मजबूर हैं। वर्तमान सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि बेरा जांच के लिए लंबित प्रक्रिया जल्द पूरी कर मशीन खरीदी जाएगी।
ढाई से तीन सौ किलोमीटर की मजबूरी भरी दौड़
लखीमपुर के मझगई थानाक्षेत्र के छेदुई पतिया गांव के मजदूर हीरालाल के बेटे संजीत कुमार (10) को सुनने की समस्या है। प्रमाणपत्र बनवाने के लिए सीएमओ कार्यालय ने बेरा जांच लिखी, लेकिन जिले में जांच की सुविधा नहीं है। संजीत अपनी मां राधा देवी और पड़ोसी राजेश कुमार के साथ केजीएमयू पहुंचे। राजेश के अनुसार, अस्पताल में दो साल से ज्यादा की वेटिंग बताई गई। इतना ही नहीं, उन्हें यह भी कहा गया कि यह वेटिंग सिर्फ लखनऊ जिले के मरीजों के लिए है, इसलिए गैर जनपद के मरीजों का पंजीकरण नहीं हो सकता। जांच करानी है तो लखनऊ सीएमओ से रेफरल पत्र लाना होगा। थके-हारे परिजन सीएमओ कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां से पत्र लिखने से मना कर दिया गया। मजबूर होकर परिवार बिना जांच कराए ही लौट गया।
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जानें, क्या है बेरा जांच
बेरा एक श्रवण परीक्षण है, जो यह मापता है कि कान में पहुंचने वाली आवाजों के जवाब में मस्तिष्क की विद्युत प्रतिक्रियाएं क्या हैं। यह परीक्षण श्रवण तंत्रिका और ब्रेनस्टेम के कार्य का आकलन करता है और मुख्य रूप से छोटे बच्चों की सुनने की क्षमता में आई कमी का पता लगाने के लिए उपयोग किया जाता है।
ऐसी होती है यह जांच

बेरा जांच मरीज के सोने के बाद हो सकती है। सोते हुए मरीज के कान के साथ ही सिर के विभिन्न हिस्सों में कैथोड लगाए जाते हैं। इनसे जो तरंगें पैदा होती हैं, उन्हें कंप्यूटर के माध्यम से जांचा जाता है। इस जांच से यह पता चलता है कि बच्चे के तंत्रिका तंत्र के कौन से हिस्से उसकी सुनने की क्षमता को प्रभावित करते हैं।
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