एसटीएफ को सबसे पहले फेन्सेडिल कफ सिरप को नशे के रूप में इस्तेमाल करने के लिए अवैध भंडारण की सूचना मिली थी। छानबीन में पता चला था कि बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल व बांग्लादेश तक सिरप की तस्करी की जा रही है। फरवरी 2024 में एसटीएफ और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की संयुक्त जांच समिति का गठन किया गया था। इसी बीच एसटीएफ को तस्करी की सूचना मिली थी, जिसके बाद एक ट्रक चालक को बड़ी मात्रा में सिरप के साथ पकड़ा गया था। पूछताछ में आरोपी चालक धर्मेंद्र कुमार ने चौंकाने वाला खुलासा किया था।
आरोपी ने बताया था कि वह कफ सिरप लेकर कूचबिहार पश्चिम बंगाल जा रहा था। इसके लिए उसे 30 हजार रुपये मिलने थे। जांच में सामने आया था कि फेन्सेडिल कफ सिरप का निर्माण हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित एबॉट हेल्थकेयर प्रा.लि. कंपनी ने किया है।
ट्रांसपोर्ट नगर में लोड करते थे सिरप
छानबीन में पता चला था कि ट्रांसपोर्टनगर में सिरप लोड किया जाता था। कई बार वहां से सिरप पश्चिम बंगाल भेजा गया था। लखनऊ में गिरोह का संचालन आगरा निवासी रॉबिन करता था। रॉबिन के कहने पर ही धर्मेंद्र ट्रांसपोर्टनगर से सिरप अलग-अलग राज्यों में ले जाता था। गिरोह वाट्सएप कॉल पर ही आपस में बात करता था। सीडीआर और अलग-अलग फर्म की पड़ताल में एसटीएफ को पूर्वांचल कनेक्शन का पता चला। इसके बाद अमित सिंह टाटा की संलिप्तता सामने आई। अमित के कई करीबी एसटीएफ की रडार पर हैं। माना जा रहा है कि अभी कुछ और लोगों को एसटीएफ गिरफ्तार करेगी।
बर्खास्त सिपाही के घर पर छिपा था अमित
पूर्व सांसद बाहुबली धनंजय सिंह का करीबी अमित एक बर्खास्त सिपाही के घर पर छिपा था। बर्खास्त सिपाही भी धनंजय सिंह का करीबी है। सूत्रों का कहना है कि एसटीएफ ने जब दबिश दी तो बर्खास्त सिपाही ने इसका विरोध किया। यही नहीं, अधिकारियों से उसकी बहस भी हुई। एसटीएफ नशीले कफ सिरप की तस्करी में बर्खास्त सिपाही की भूमिका की पड़ताल कर रही है।