गिरोह का जाल यूपी के अलावा बिहार, पंजाब, मध्य प्रदेश, चंडीगढ़ में जाल फैला हुआ था। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में कंपनियों के दफ्तर भी थे। जैसे जैसे ठगी को अंजाम देते गए, वैसे वैसे दफ्तरों पर ताला बंद कर सभी फरार होते गए। तब ठगी का शिकार हुए लोगों ने एफआईआर दर्ज करवानी शुरू की थी।
डेढ़ सौ मुकदमें, अभी तक की जांच में 23 मामलों में ही नीलम नामजद
जेल में लगभग तीन महीने रहने के बाद अभय कुशवाहा की जमानत हो गई। बाद में फिर गिरफ्तार हुआ। नीलम के ऊपर लखनऊ, फतेहपुर, नोएडा, मुजफ्फरपुर (बिहार), मोहाली, पठानकोट, जीरकपुर (पंजाब) में करीब डेढ़ सौ मुकदमें दर्ज हैं। नीलम के खिलाफ अभी तक की जांच में 23 मामले सामने आए हैं, जिसमें वह नामजद है।
मेहरबानी से चार साल तक आजाद रही नीलम
ठगी संबंधी सभी केसों की विवेचना आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा की ओर से की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद नीलम वर्मा को पकड़ने की कोई जद्दोजहद नहीं की गई। जानकारी के मुताबिक कुछ विवेचकों की उस पर मेहरबानी रही, इसलिए उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। जबकि वह शहर में ही किराये के मकान में रह रही थी।