नव वर्ष के स्वागत में बही कविताओं की बयार
लखनऊ। एसी, पंखे, कूलर हों पर नीम की छांव जरूरी है, शहर में कितनी सुविधाएं हों लेकिन गांव जरूरी हैं...। नव वर्ष के स्वागत में बृहस्पतिवार को सरदार पटेल सामाजिक एवं साहित्यिक संगठन की ओर से हिंदी संस्थान के निराला सभागार में आयोजित कवि सम्मेलन में हास्य कवि अजय प्रधान ने जब यह कविता पढ़ी तो हर कोई वाह-वाह कर उठा।
अध्यक्षता करते हुए डाॅ. ओपी वर्मा ओम ने पढ़ा कि देश हमारा सर्वोपरि है, मैं यही बताने आया हूं, मातृभूमि के चरणों में शीश झुकाने आया हूं...। डाॅ. निशा सिंह नवल ने मंशिफ, नेता, अफसर तो बन जाएंगे, पर सब कोई इंसान बनना मुश्किल है.....। पढ़ कर मौजूदा हालात पर कटाक्ष किया। भारती पायल, सरिता कटियार, हीरा जोशी, डाॅ. अरविंद झा, गोबर गणेश, डाॅ. शरद पांडेय शशांक, अंकिता शुक्ला, अजीत श्रीवास्तव, पिंकी प्रजापति आदि ने रचनाएं सुनाईं। संस्था के उपाध्यक्ष पाती राम गंगवार ने मेहमानों का स्वागत किया। (संवाद)
नव वर्ष के स्वागत में बही कविताओं की बयार
नव वर्ष के स्वागत में बही कविताओं की बयार