नैमिषारण्य तीर्थ
लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग
दूरी - करीब 100 किलोमीटर
समय - करीब 3 घंटे
आपके घर से कुछ दूर एक ऐसी जगह भी है, जहां कलियुग की छाया तक नहीं पहुंचती। दूर तक फैले इस जंगल में कई जगहें सतयुग की यात्रा पर ले जाती हैं। महाभारत से लेकर आईने अकबरी तक के प्रमाण इस जगह मौजूद हैं। इस वीकेंड आपको ले चलते हैं इस तीर्थ की यात्रा पर...
सतयुग में संतों को डर सताया कि कलियुग की काली छाया में उनकी आराधना व्यर्थ जाएगी। उन्होंने भगवान ब्रह्मा से गुहार लगाई और ऐसी जगह का वरदान मांगा, जो कलियुग की छाया से दूर हो।
ब्रह्मा ने संतों की बात मानते हुए अपने हृदय से एक चक्र बनाया और धरती पर फेंक दिया। लखनऊ से करीब 100 किलोमीटर दूर जब ब्रह्मा का चक्र गिरा तो सीतापुर में निमिषा नाम से विख्यात जंगल का यह हिस्सा नैमिषारण्य तीर्थ के रूप में विश्वविख्यात हो गया।
इसकी चर्चा श्रीमद् भागवद पुराण से लेकर शिव पुराण और स्कंद पुराण में इस तीर्थ का जिक्र आता है। यह भी कहा जाता है कि महर्षि व्यास ने ज्यादातर ग्रंथ और पुराण इसी पवित्र स्थान पर लिखे। यह बात भी प्रचलित है कि यहीं पर अश्वमेध यज्ञ हुआ था।
गोमती नदी के किनारे बसे इस तीर्थ के चारों ओर जंगल हैं। बीचोंबीच तीन कुंड और चक्रतीर्थ है। इसमें स्नान करने को धार्मिक विधि-विधान और आरोग्य से जोड़कर देखा जाता है।
खैर, आपके लिए यहां प्राकृतिक सुंदरता की अद्भुत छटा मौजूद है। यहां हनुमान गढ़ी है तो पांडव किला भी, व्यास गद्दी है तो मां आनंदमयी का मंदिर और सीताकुंड भी। वीकेंड पर इस जगह की सैर न सिर्फ आपको सुकून बख्शती है, बल्कि कुछ वक्त के लिए संतों, जंगलों और नदी के करीब भी ले जाती है। और क्या पता, आपकी भी कोई मुराद यहां आकर पूरी हो जाए...
ठहरने का इंतजाम
यहां ठहरने के लिए आपके पास कई विकल्प मौजूद हैं। आस-पास कई धर्मशालाएं हैं तो नैमिष का पर्यटक आवास गृह भी। यहां ठहरने के लिए आप 05865-251287 पर संपर्क कर सकते हैं।
भूख लगे तो
इस सैर पर निकलते वक्त आप घ्ार से भी पूड़ी-सब्जी या कुछ खाना लेकर चल सकते हैं। इसके अलावा, सीतापुर के सिधौली में भी खानपान की अच्छी व्यवस्था है।
नैमिष में भी भोजन का बंदोबस्त है। हालांकि, कोई साज-सज्जा वाला शानदार रेस्तरां यहां जरूर नहीं मिलेगा। यहां पहुंचने के लिए इस मैप की भी मदद ले सकते हैं।