...आप सभी जनमानस को हम जानकारी देते हैं कि जो भी कर्मी निष्ठा व लगन से जितना भी ड्यूटी करे। अगर वह अपने अधिकारियों को हर महीने चढ़ावा न करें तो सब बेकार। कार्यालय के लोगों को भी समझना पड़ता है। एसओ राजबहादुर सिंह जब से आए हैं। तब से सभी कर्मचारी, परेशान हैं। यह सभी विवेचनाओं में रुपयों की मांग करते हैं। सीडी सामने प्रस्तुत करने पर ही वह हस्ताक्षर बनाते हैं। वरना वह थाने में पड़ी रहती है।
मृतक ने थाने में ही तैनात कुछ अन्य पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाया है। कि वह थाने पर आने वाले मामलों में रूपये ऐंठ कर थाना इंचार्ज को देते हैं। घर पर सो रहे लोगों को अवैध शराब आदि मामलों में भेज देते हैं। दरोगा ने लिखा है कि सभी उसके खिलाफ साजिश कर उसे नौकरी से हटाना चाहते हैं। ईमानदार व्यक्ति की पुलिस में इज्जत नहीं है। 10/24 की विवेचना में किसी ने सहयोग नहीं किया है...यह लाइनें एक पत्र में लिखी हुई हैं। यह पत्र दरोगा मनोज कुमार की मौत के बाद से लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसे मनोज कुमार का सुसाइड नोट बताया जा रहा है। एसपी चक्रेश मिश्र ने बताया कि यह सुसाइड नोट किसी को मिला नहीं है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक इस पत्र को दरोगा ने अपने बेटे को व्हाट्सएप किया था। दरोगा के परिवार के साथ हम लोग खड़े हैं। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी। इसकी जांच एएसपी दक्षिणी को सौंपी है। हर बिंदु पर जांच होगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
गौरतलब है कि मछरेहटा थाने में तैनात दरोगा मनोज कुमार (54) ने शुक्रवार को खुद को थाना परिसर के भीतर गोली मार ली। उन्होंने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से सीने पर गोली मारी। इसके बाद जिला अस्पताल में उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के बाद अस्पताल पहुंची पत्नी गीता देवी ने बताया कि पति बहुत दबाव में थे। फोन पर इस बात का जिक्र करते थे। वह तनाव में रहते थे। इसके ठीक बाद सोशल मीडिया पर एक सुसाइड नोट वायरल हो गया। इसमें एसएएचओ मछरेहटा व अन्य पुलिसकर्मियों पर रिश्वतखोरी संग अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पत्नी बोली- दबाव में थे पति, मिले इंसाफ
दरोगा की पत्नी गीता देवी ने बताया कि दरोगा ने उन्हें बताया कि उनके ऊपर बहुत दबाव बनाया जाता है। वह बहुत तनाव में थे। उन्हें इंसाफ चाहिए। वहीं, एक भाजपा नेता रामदयाल राजवंशी ने बताया कि इस मामले की निष्पक्षता से जांच की जाए। जो भी दोषी पाया जाए, उसे सजा दी जाए। उन्होंने बताया कि दरोगा मनोज कुमार स्वाभिमानी व्यक्ति थे। उन्हें पता चला है कि दरोगा की इंस्पेक्टर से तीखी नोंक झोंक हुई है।
डॉक्टरों के पैनल के बीच हुआ पोस्टमार्टम
दरोगा मनोज कुमार (54) मूल रूप से फतेहपुर जनपद के कल्याणपुर थाना क्षेत्र के जलाला गांव निवासी थे। उनका परिवार लखनऊ जनपद के बिजनौर क्षेत्र में रहता है। उनका पोस्टमार्टम शुक्रवार को ही कराया गया। जो कि चिकित्सकों के पैनल में वीडियोग्राफी के साथ किया गया है। परिजनों ने मौखिक रूप से बताया कि वह बिजनौर में ही शव का अंतिम संस्कार करेंगे। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
पांच माह पूर्व ही बने थे दरोगा
मनोज कुमार वर्ष 1990 में बतौर सिपाही उत्तर प्रदेश पुलिस में शामिल हुए थे। उसके बाद यह कोतवाली देहात जनपद सीतापुर में काफी समय तक पैरोकार के पद पर तैनात रहे। पांच माह पूर्व ही यह दीवान से दरोगा प्रोन्नत हुये थे। सूत्रों की मानें तो मछरेहटा थाने में तैनाती के बाद से ही तनावग्रस्त रहने लगे। हाल ही में एक युवती के भागने के मामले में विवेचना कर रहे थे। इसको लेकर उनके उच्चाधिकारी काफी दबाव बना रहे थे।