डॉ. राममनोहर लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने बुजुर्ग महिला के दिमाग में बनी गांठ की बेहद जटिल सर्जरी कर उन्हें नई जिंदगी दी। यह गांठ दिमाग के मोटर कॉर्टेक्स यानी उस हिस्से में थी जिससे हमारे शरीर की मांशपेशियां नियंत्रित होती हैं।
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गांठ की वजह से मरीज को झटके यानी दौरे आने की शिकायत शुरू हुई जो कि बढ़ती ही जा रही थी। 15 से 20 बार झटके आने की वजह से बायां पैर पूरी तरह सुन्न हो गया था। सर्जरी में जरा-सी चूक मरीज को अपंग बना सकती थी।
डॉक्टरों ने इस चैलेंजिंग सर्जरी के लिए ‘न्यूरो नेविगेशन गाइडेड सीजर सर्जरी’ टेक्निक की मदद ली। 3 घंटे की सर्जरी के बाद मरीज अब सामान्य हो रही है। सुन्न पड़े बाएं पैर में हरकत होने लगी है।
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लोहिया संस्थान के डॉक्टरों का दावा है कि दौरे आने वाले मरीज की आधुनिक तरीके से इस तरीके ऑपरेशन का प्रदेश में यह पहला मामला है।
केस स्टडी : 60 साल की उम्र में आने लगे दौरे
हरदोई की वसुधा (60) को आठ महीने पहले दौरे आने शुरू हुए। परिवारीजनों ने बताया कि केजीएमयू से लेकर पीजीआई तक दौड़ लगाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। करीब डेढ़ महीने पहले मरीज को लेकर लोहिया संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभाग पहुंचे तो डॉक्टरों ने एमआरआई जांच रिपोर्ट देखी तो पता चला कि दिमाग के मोटर कॉर्टेक्स में गांठ है जिसकी वजह से मरीज को लगातार झटके आ रहे हैं। बायां पैर भी इसी वजह से सुन्न पड़ गया।
ये ऑपरेशन इसलिए था जटिल
न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. राकेश कुमार सिंह के मुताबिक मोटर कॉर्टेक्स के दाहिने हिस्से में गांठ था। इसकी सर्जरी में बहुत अधिक खतरा था। मोटर कॉर्टेक्स को जरा-सा भी नुकसान होने पर मरीज के शरीर का बायां हिस्सा पूरी तरह लकवाग्रस्त हो जाता।
जानिए क्या काम करता है मोटर कॉर्टेक्स
दिमाग में मोटर कॉर्टेक्स का काम शरीर के हाथ, पैर और चेहरे को नियंत्रण करना होता है। दिमाग के दाएं तरफ की मोटर कॉर्टेक्स शरीर के बाएं हिस्से को जबकि बाएं तरफ की कॉर्टेक्स दाएं तरफ के हिस्से को नियंत्रित करती है।
दिल्ली और चेन्नई से बुलाए स्पेशल टेक्नीशियन
डॉक्टर राकेश कुमार सिंह
- फोटो : amar ujala
डॉ. राकेश के मुताबिक एमआरआई और अन्य जांचों से दिमाग के प्रभावित हिस्से की स्थिति को परखा गया। दिमाग की सटीक जांच के लिए चेन्नई और दिल्ली से स्पेशल टेक्नीशियन बुलाए गए।
इसके बाद एमआरआई मशीन की मदद से ट्रैक्टोग्राफी की गई जिससे मोटर कॉर्टेक्स की स्थिति की पूरी जानकारी आसानी से मिल सकी। ट्रैक्टोग्राफी रिपोर्ट को न्यूरो नेविगेशन मशीन में इंपोर्ट किया गया जिससे सुपर इंपोज्ड इमेज जनरेट की गई जिससे मोटर कॉर्टेक्स में बनी गांठ के साथ उस हिस्से की जांच की गई।
हर चीज को सटीकता से परखा
मरीज को दो जून को ओटी में शिफ्ट किया गया। तीन गुणा तीन सेमी की हड्डी को काटकर हटाया गया। इसके बाद सिर की ड्यूरा लेयर को इलेक्ट्रोड नेविगेशन गाइडेड टेक्नीक ‘लिजेनेक्टमी’ से गांठ के साथ उस हिस्से को चिह्नित किया गया जो झटका आने का बड़ा कारण बन रहा था।
जो हिस्सा जो खराब हो चुका था उसे निकाल दिया गया। दिमाग की हर हरकत पर निगरानी के लिए विशेष तरह के निम मॉनिटर का इस्तेमाल किया गया। तीन घंटे तक चली सर्जरी के बाद सिर की निकाली गई हड्डी ‘स्कैल्प’ को दोबारा फिक्स कर दिया गया।
एमआरआई मशीन की मदद से ट्रैक्टोग्राफी की गई
- फोटो : amar ujala
डॉ. राकेश ने बताया कि मोटर कॉर्टेक्स में गांठ की समस्या से परेशान मरीज के न्यूरो नेविगेशन गाइडेड सर्जरी पर करीब 50 हजार रुपये का खर्च आया है। दप्राइवेट सेंटर में ये ऑपरेशन किया जाता तो कम से कम पांच लाख रुपये खर्च करने पड़ते।
देश के कुछ चुनिंदा कारपोरेट अस्पतालों में मरीजों को इसके लिए सात से आठ लाख रुपये देने पड़ते हं। फिलहाल लखनऊ में ऐसा कोई सेंटर नहीं है जहां इस तरह की समस्या से ग्रसित मरीज का एडवांस्ड तरीके से ऑपरेशन किया जा सके।
जल्द ही चल फिर सकती हैं
डॉक्टरों के मुताबिक अब मरीज पूरी तरह ठीक है। बाएं पैर में भी हरकत दिखने लगी है और मरीज धीरे-धीरे सहारे की मदद से चल सकती है। लगातार छह महीने तक दवाएं चलाने के साथ जरूरी एक्सरसाइज भी बताई गई है इससे सुन्न पड़े पैर में ताकत आएगी। डॉक्टरों का अनुमान है कि पांच से छह महीने के भीतर वसुधा के पैरों में पूरी ताकत आ जाएगी।
इन डॉक्टरों की टीम ने किया ये कमाल
न्यूरो सर्जरी विभाग के हेड डॉ. दीपक सिंह, न्यूरो सर्जन डॉ. राकेश कुमार सिंह, न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. दिनकर कुलश्रेष्ठ के साथ निदेशक और एनेस्थेसिया विभाग के हेड डॉ. दीपक मालवीय, डॉ. पीके दास समेत डॉ. मनोज के साथ डॉ. हनुमान, डॉ. सुरेंद्र और डॉ. अनुज की टीम मौजूद रही।