शासन में आजकल एक पीसीएस अधिकारी चर्चा में हैं। चर्चा उनके इलाहाबाद, पेन और चश्मे को लेकर है। यह साहब पहले शासन में थे।
वह भी उस विभाग में जो लोगों को छत मुहैया कराने की योजनाएं तैयार करता है। सत्ता बदली, भाग्योदय हो गया।
विकास प्राधिकरण में तैनाती पा गए। पर व्यवहार और उनके किस्सों ने जिम्मेदारियों को भी पीछे छोड़ दिया। मीटिंग हो या कोई मिलने वाला उनके किस्से की मार से बच नहीं पाता है।
शासन में बैठक के दौरान जब इन्हें बुलाने की बात आती है तो सबसे पहले इनके किस्से की चर्चा शुरू हो जाती है, वजह बैठक में भी यह अपने किस्से सुनाने से बाज नहीं आते।
शासन में छोटा हो या बड़ा किसी भी अधिकारी से सिर्फ इलाहाबाद, पेन और चश्मे की चर्चा भी कर दें, तुरंत बता देगा कि फलां व्यक्ति किससे मिलकर आ रहा है। पर साहब बहादुर हैं कि, अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।