रंग लोक सांस्कृतिक संस्थान की ओर से रंग महोत्सव की दूसरी शाम इस नाट्य प्रस्तुति में प्रेम और अध
लखनऊ। भारतीय पुरातन कथाओं में राधा-कृष्ण की प्रेम कहानी अमर है जिसके अनेक रूप अलग-अलग ग्रंथों, पुस्तकों, कथाओं और चलचित्रों में देखने को मिलते रहे हैं। मंगलवार की शाम गोमतीनगर स्थित संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में प्रेम की यह गाथा अपने नए कलेवर के साथ मंच पर उतरी, जिसे नाम दिया गया श्याम रंग। रंग लोक सांस्कृतिक संस्थान की ओर से रंग महोत्सव की दूसरी शाम इस नाट्य प्रस्तुति में प्रेम और अध्यात्म के संगम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्याम रंग को अपनी लेखनी में उतारा जावेद सिद्दीकी ने और डिंपी मिश्रा ने इसका निर्देशन किया।
नाटक की कहानी महाभारत के युद्ध के बाद से शुरू होती है जब पांडव जीत चुके हैं और कृष्ण द्वारका में अपनी पत्नियों के साथ रहते हैं। रुक्मिणी, जो सबसे बड़ी और बुद्धिमान है, फिर भी अपने स्थान को लेकर असुरक्षा महसूस करती हैं। वह राधा के रहस्य को जानने के लिए एक आयोजन करती हैं और कृष्ण की बांसुरी पाने की यात्रा पर निकल पड़ती हैं। यह नाटक भगवान और मानव के बीच की रेखा की तलाश करते हुए कृष्ण की दिव्यता से अधिक मानवता से रूबरू कराता है। मुख्य भूमिकाओं में डिंपी मिश्रा (कृष्ण) और हर्षिता मिश्रा (राधा) ने सशक्त अभिनय किया। प्रियंक कठेरिया (छोटे कृष्ण) और अर्चना सिंह (छोटी राधा) ने बाललीला के दृश्यों में दर्शकों का मन जीत लिया। पूजा सिंह (रुक्मणी), लक्ष्मीकांत लकी (सत्यभामा), अजय शर्मा (युधिष्ठिर), अमित द्विवेदी (अर्जुन/नंद), स्निग्धा द्विवेदी (यशोदा), राज (दास) और नैंसी (दासी) ने भी अपने अभिनय से कथा को गहराई दी।
रंग लोक सांस्कृतिक संस्थान की ओर से रंग महोत्सव की दूसरी शाम इस नाट्य प्रस्तुति में प्रेम और अध
रंग लोक सांस्कृतिक संस्थान की ओर से रंग महोत्सव की दूसरी शाम इस नाट्य प्रस्तुति में प्रेम और अध
रंग लोक सांस्कृतिक संस्थान की ओर से रंग महोत्सव की दूसरी शाम इस नाट्य प्रस्तुति में प्रेम और अध