राजधानी की खान-पान की गली जल्द अवधी व्यंजनों की खुशबू से महकेगी। प्रदेश की यह पहली गली होगी, जिसकी पहचान अवध का खान-पान होगा।
समता मूलक चौराहे से गोमती बंधे की ओर जाने वाले रास्ते पर आशा ज्योति लेन की 10 पक्की दुकानें शहर के मशहूर व्यंजन परोसने वालों को आवंटित करने की स्मारक समिति तैयारी कर रही है। इनका किराया समिति की बोर्ड बैठक में तय होगा।
‘अमर उजाला’ व संस्कृति विभाग के संयुक्त आयोजन ‘संगमम् संस्कृतियों का’ में 25 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि प्रदेश के हर बड़े शहर में एक ऐसी गली होनी चाहिए, जहां भारत के हर प्रांत का खान-पान मिलता हो। इसके लिए सीएम ने संस्कृति विभाग, आवास विकास और लखनऊ विकास प्राधिकरण को प्रयास करने के लिए कहा था।
शासन से लेंगे मंजूरी
प्राधिकरण के सचिव एवं स्मारक समिति के मुख्य महाप्रबंधक पवन कुमार गंगवार ने बताया कि इन दस दुकानों को शासन ने मत्स्य विभाग को आवंटित किया था। विभाग ने इनमें से एक ही दुकान खोली थी, जो चल नहीं सकी। काफी समय से ये दुकानें बंद हैं। अब मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद ये दुकानें दूसरे को आवंटित करने के लिए शासन से मंजूरी ली जाएगी। इसका प्रस्ताव तैयार हो रहा है।
वेबसाइट पर अपलोड होंगी शर्तें
खान-पान की गली की 10 दुकानों का कारोबारियों को सीधे आवंटन होगा। इसकी सेवा शर्तें हफ्ते भर में वेबसाइट पर अपलोड हो जाएंगी। ये दुकानें उन मशहूर ब्रांड को ही आवंटित होंगी, जिनकी शहर में पहचान है।
- डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, उपाध्यक्ष, एलडीए