इंस्पेक्टर पंकज कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब पांच बजे शांति बच्चा चोरी होने का शोर मचाते हुए वार्ड से बाहर आई तो हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने एनआईसीयू की गार्ड रीना व सिक्योरिटी इंचार्ज प्रदीप दुबे से पूछताछ की।
दरोगा अमित गंगवार ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसमें जिस वार्ड में शांति का बेटा भर्ती था, उसके भीतर किसी बाहरी का आना-जाना नहीं दिखा। इसी बीच वार्ड में भर्ती दूसरे बच्चे की मां ने शांति के खिड़की से बच्चा फेंकने की जानकारी दी तो सबके होश उड़ गए।
पुलिस ने नीचे जाकर शव बरामद किया। शांति से सख्ती से पूछताछ करने पर उसने खुद बच्चे को फेंकने की बात कुबूल कर ली। सीओ ने बताया कि पति की ओर से मुकदमा दर्ज कराकर शांति को गिरफ्तार कर लिया गया है।
एनआईसीयू वार्ड में भर्ती दूसरे बच्चे की मां ने बताया कि शांति ने सुबह करीब साढ़े चार बजे बच्चे को गोद में दूध पिलाया। 15-20 मिनट तक बच्चे को दुलारने के बाद उसे खिड़की से नीचे फेंक दिया। महिला का कहना था कि यह देख उसका कलेजा कांप गया। इसके बाद शांति ने बच्चा चोरी का शोर मचाना शुरू कर दिया।
मेटाबोलिक डिसऑर्डर से था पीड़ित: मीडिया प्रभारी प्रो. संदीप तिवारी ने बताया कि बच्चे को मेटाबोलिक डिस्ऑर्डर के साथ पीलिया था। इसमें पाचन तंत्र फेल हो जाता है। डायबिटीज, थायराॅइड, यूरिक एसिड बढ़ने के साथ गुर्दे और अग्नाशय की बीमारियां घेर लेती है।
शांति ने कहा, मेरे जिगर का टुकड़ा बहुत तकलीफ में था। ...न रोता था न मुस्कुराता था। इंजेक्शन से उसका शरीर कई जगह से छिद गया था। उसकी नन्हीं सी नाक में सांस के लिए पाइप लगा था। डॉक्टर हाथ तो कभी उसके पैर में ड्रिप लगा देते थे। मैं देखती रहती थी। ...कितनी तकलीफ होती होगी न उसे।
शांति ने कहा, ऐसे बच्चे की मां की हालत क्या होगी, यह कोई नहीं सोच सकता। कभी ठीक से छाती से भी नहीं चिपटा सकी लाडले को...। बच्चे को क्यों फेंका? यह पूछने पर शांति सिर्फ रोती रही। उसने कहा कि वह तो बेटे को खिला रही थी।
पता नहीं क्या हो गया, न जाने कैसे उसे फेंक दिया। राजन सिंह ने बताया कि शांति से उसका विवाह 2013 में हुआ था।