शिक्षा विभाग में गड़बड़ घोटाले का कोई जोड़ नहीं है। अधिकारी से लेकर बाबू तक कब कौन सा गुल खिला दें कोई कुछ नहीं कह सकता।
एक ऐसा ही कारनामे का खुलासा हुआ है जिसमें इलाहाबाद के एक वरिष्ठ लिपिक ने माध्यमिक शिक्षा मंत्री महबूब अली के फर्जी हस्ताक्षर के सहारे मनचाही तैनाती पाने में सफलता प्राप्त कर ली।
जब इसकी जांच कराई गई तो बेसिक शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव अजीत प्रकाश की भूमिका संदिग्ध पाई गई।
वरिष्ठ लिपिक को निलंबित कर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश देने के साथ संयुक्त सचिव को बेसिक शिक्षा विभाग से हटा दिया गया है।
प्रदेश में शिक्षा विभाग का बहुत बड़ा दायरा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के दफ्तरों में जरूरत के हिसाब से पोस्टिंग की जाती रहती है।
शिक्षा विभाग के कई अधिकार व कर्मचारी ऐसे हैं जो मनचाही तैनाती के लिए जोड़तोड़ में लगे रहते हैं। इसमें कुछ ऐसे भी होते हैं जो नियमों को ताक पर रखने से भी नहीं चूकते हैं। ऐसा ही एक मामला इलाहाबाद का है।