गिरफ्तार किया गया युवक व मौके पर मौजूद ग्रामीण।
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बाराबंकी में सतरिख थाना क्षेत्र के बबुरिहा गांव में बृहस्पतिवार भोर एक युवक ने विवाद के बाद पत्नी को फावड़े से काट डाला। युवक ने स्वयं भी फांसी लगाकर जान देने की कोशिश की। परिवारजनों ने ग्रामीणों की मदद से उसे पकड़कर बांध दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर खून से सना फावड़ा बरामद कर लिया है। परिवारीजनों का कहना है कि युवक मनोरोगी है।
बबुरिहा मजरे जैनाबाद गांव निवासी मुन्नूलाल रावत ने पुलिस को बताया कि, उसका पुत्र अजय रावत (38) अपनी पत्नी वर्षा (36) व अपने चार बच्चों के साथ अलग मकान में रहता है। उसे गुस्सा जल्दी आता था और इस मनोरोग के कारण उसका केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग में इलाज भी चला था। बृहस्पतिवार को अजय ने अपने बेटे राज को जगाते हुए कहा कि किसी ने उसकी मम्मी डाला है। शोरगुल सुनकर पासके ही मकान में रहने वाले पिता व अन्य परिवारीजन पहुंचे तो देखा कि बिस्तर पर ही वर्षा का लहुलुहान शव पड़ा है। पास में ही खून से सना फावड़ा देख कर पिता ने ही अजय को पकड़ लिया।
इसी दौरान अजय छिटककर भागा और कमरे में जाकर फांसी लगाने लगा। तब तक गांव के कई लोग एकत्र हो गए थे और सभी ने मिलकर अजय को पकड़कर बांध दिया। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर अजय को हिरासत में ले लिया। पुलिस के अनुसार, किसी बात को लेकर अजय की पत्नी से कहासुनी हुई थी। अजय ने फावड़े से अपने पत्नी के शरीर पर करीब आधा दर्जन प्रहार किए। उसका चेहरा, गला सब कट चुका था। सूचना पाने के बाद मृतक के मायके वाले भी आ गए। पुलिस ने अजय को गिरफ्तार करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पिता मुन्नूलाल की तहरीर पर ही केस दर्ज किया गया। एएसपी डॉ. अखिलेश नारायण सिंह ने बताया कि युवक को परिवारजन मनोरोगी बता रहे हैं। मामले की छानबीन की जा रही है।
मां की मौत पर बिलखते रहे मासूम
अजय व वर्षा के चार बच्चे है। 12 वर्षीय राज, 10 वर्षीय नीरज, 9 वर्षीय पुत्री रोली व 6 वर्षीय काजल मां की हत्या के बाद बिलखते रहे। बच्चे बहुत सहमे हुए थे। बाबा मुन्नूलाल व ननिहाल पक्ष के लोग बच्चे को संभालने में लगे थे। अब इन बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी बाबा मुन्नूलाल पर आ गई है।
गुस्सा व शराब ने तबाह किया जीवन
पिता मुन्नूलाल का कहना है कि अजय को बात बात पर गुस्सा आता था। कई बार उसने स्वयं भी फांसी लगाकर जाने देने की कोशिश की। वर्ष 2006 में उसका इलाज शुरु हुआ तो वह नार्मल हो गया था। लखनऊ में मजदूरों की ठेकेदारी करनी शुरु कर दी थी। रोज तीन हजार रुपया कमाता था। मगी इसी बीच उसे शराब की लत लग गई। इससे उसका मानसिक संतुलन और बिगड़ता गया।