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एक फिल्म की तर्ज पर रची साजिश, बेगुनाह बाप को कत्ल के आरोप में पहुंचा दिया जेल

Thu, 15 Nov 2018 03:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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आरोपी गौरव पांडेय व उसकी प्रेमिका और दिलीप पांडेय ( दाएं से बाएं) - फोटो : amar ujala
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लखनऊ में हत्या जैसे संगीन अपराध की तफ्तीश में पुलिस की लापरवाही की वजह से एक वकील को 55 दिन सलाखों के पीछे काटने पड़े। वकील और उसका परिवार बेगुनाही की दुहाई देता रहा, लेकिन पुलिस ने एक न सुनी। अज्ञात युवक के शव की शिनाख्त के साथ हत्या आरोपी वकील की गिरफ्तारी का दावा करके इनाम झटक लिया।
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दरअसल, वकील ने अपनी बेटी के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस के हरकत में आने पर युवती के साथ आरोपी युवक अंडरग्राउंड हो गया। पुलिस का दबाव बढ़ने पर युवक के माता-पिता ने साजिश रची और आशियाना इलाके में मिले अज्ञात शव की शिनाख्त करके वकील को हत्या के जुर्म में फंसा दिया।

 

डेढ़ महीने बाद पुलिस अफसरों को पता चला कि जिस युवक की हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था वह जीवित है। फटकार लगने पर आशियाना पुलिस ने अंडरग्राउंड प्रेमी युगल को पकड़ा और गलत शिनाख्त करने वाले माता-पिता समेत आठ लोगों पर कार्रवाई की गई। 

अजब प्रेम की गजब कहानी 

डेमो
राजाजीपुरम के ई-ब्लॉक निवासी गौरव पांडेय की वर्ष 2008 में महानगर इलाके में रहने वाले एक वकील की बेटी से दोस्ती हुई। कुछ ही दिनों दोनों ने एक साथ जिंदगी बिताने का इरादा बना डाला। परिवारीजन शादी को तैयार नहीं थे।

इसके चलते गौरव 18 सितंबर 2009 को घर से भाग निकला, लेकिन चार दिन बाद लौट आया। प्रेमीयुगल ने घर से भागकर शादी और कहीं दूर रहने की तैयारी में जुट गए। दोनों नौ नवंबर को अपने घरों से जरूरत का सामान लेकर भाग निकले।

युवती के पिता ने महानगर कोतवाली में बेटी के अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई और गौरव के पिता दिलीप पांडेय ने तालकटोरा थाने में गुमशुदगी दर्ज करा दी। उनका कहना था कि गौरव अपने घर से 53 सौ रुपये, मां के गहने और कपड़े लेकर निकला था। 

युवती के वकील पिता ने बेटी की खुद तलाश के साथ वकीलों की मदद से महानगर पुलिस पर दबाव बनाया। पुलिस को हरकत में आते देख अंडरग्राउंड गौरव के परिवारीजनों ने वकील को फंसाने की साजिश रच डाली। पिता दिलीप पांडेय और मां सरोजनी देवी 14 नवंबर को आशियाना थाने पहुंचे और 10 नवंबर को आशियाना के मुराइन खेड़ा के तालाब में मिले शव की शिनाख्त फोटो व कपड़ों के आधार अपने बेटे गौरव उर्फ विक्की पांडेय (22) वर्ष के रूप में की।

दिलीप पांडेय की तहरीर पर आशियाना पुलिस ने 14 नवंबर को ही वकील, उसकी पत्नी, बेटे और अपहृत बेटी के खिलाफ हत्या और लूट की प्राथमिकी दर्ज कर ली। थोड़ी ही देर बाद आरोपी वकील को हिरासत में ले लिया गया। 

गले की फांस बनी ऑनर किलिंग की तफ्तीश

- फोटो : डेमो
दिलीप पांडेय और उनके परिवारीजनों को पता था कि उनका बेटा गौरव अपनी प्रेमिका के साथ अंडरग्राउंड है। आशियाना इलाके में अज्ञात युवक का शव मिलने की खबर पढ़कर उन्हें फिल्म अंधा कानून की कहानी याद आई। एक रिश्तेदार पुलिसकर्मी के साथ मिलकर साजिश रची और अज्ञात शव के पोस्टमार्टम व अंतिम संस्कार के बाद आशियाना थाने पहुंचे।

रिश्तेदार पुलिसकर्मी की पैरवी पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज करके आरोपी वकील को पकड़ लिया गया। तीन दिन हिरासत में रखकर जुर्म कुबूल कराने के लिए यातनाएं दी गईं। बेगुनाही की दुहाई दे रहे वकील को 17 नवंबर 2009 मजिस्ट्रेट ने न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। इसके बाद पुलिस ने वकील के परिवार के अन्य नामजद लोगों की तलाश में दबिशें देनी शुरू कर दीं। 

अज्ञात शव की शिनाख्त होते ही आशियाना पुलिस ने ऑनर किलिंग का मामला मान लिया। मुकदमे से लूट की धारा हटाने के साथ हत्या व साक्ष्य मिटाने के आरोप में वकील को सलाखों के पीछे पहुंचाया। इस बीच वकील की पैरवी कर रहे एक साथी को खेल का संदेह हुआ।

दरअसल, अज्ञात शव के पोस्टमार्टम में डॉक्टरों ने उसकी उम्र 35 वर्ष होने का अनुमान लगाया था, जबकि गौरव 22 साल का था। डॉक्टरों ने 10 नवंबर 2009 को तालाब में मिले शव की मौत पांच दिन पहले होने की पुष्टि की थी, जबकि गौरव नौ नवंबर 2009 को लापता हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट तत्कालीन थानाध्यक्ष कल्याण सिंह सागर के गले की फांस बनने लगी। 
 

साथी वकील ने दिलाया इंसाफ 

- फोटो : डेमो
ऑनर किलिंग में जेल भेजे गए वकील ने मुलाकात करने आए अपने साथी वकील को अपनी बेगुनाही की जानकारी देने के साथ दुखड़ा सुनाया। संदेह हो चुका था कि गौरव के माता-पिता ने किसी और युवक के शव की शिनाख्त की है। उसके परिवारीजनों की गतिविधियों की निगरानी शुरू कराई।

उसे 15 दिसंबर 2009 को पता चला कि गौरव की अपने माता-पिता से फोन पर बातचीत होती है। उसने शासन और पुलिस के आला अफसरों को अर्जी दी। वकीलों के प्रतिनिधि मंडल ने भी सच उजागर करने का दबाव बनाया। इस बीच डेढ़ महीने से अंडरग्राउंड युवती ने अपने घरवालों को कॉल कर दी। 

आला अफसरों के आदेश पर गौरव के माता-पिता व अन्य करीबी लोगों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लिए गए। इससे गौरव के नंबर का सुराग लगा और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से उसका लोकेशन ट्रेस किया गया। गौरव के जीवित होने के दावे के साथ वकील की पैरवी पर हाईकोर्ट ने आठ जनवरी 2010 को जेल में बंद वकील की जमानत मंजूर की।

गुत्थी उलझते देख पुलिस अफसरों ने सख्ती की तो आशियाना पुलिस ने 11 जनवरी की रात दिलीप पांडेय को हिरासत में लेकर पूछताछ की और थोड़ी देर बाद उसके बेटे गौरव को प्रेमिका के साथ पकड़ा गया। इन तीनों की गिरफ्तारी के साथ युवती के वकील पिता को बेगुनाह करार देते हुए कोर्ट में अर्जी दी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जेल में बंद वकील की तत्काल रिहाई के आदेश दिए। 
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फर्जी शिनाख्त से हत्या का राज दफन

- फोटो : डेमो
सच उजागर करने के साथ पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि युवती भी अपने प्रेमी गौरव के साथ पिता को फंसाने की साजिश में शामिल थी। इन दोनों के अलावा गौरव के माता-पिता व चार अन्य रिश्तेदारों पर कार्रवाई की गई, लेकिन 55 दिन तक जेल में रहे वकील ने अपनी बेटी को गुनहगार नहीं माना। उनका कहना था कि उनकी बेटी गौरव व उसके परिवारीजनों के दबाव में थी। 

राजाजीपुरम के दिलीप पांडेय और उसकी पत्नी सरोजनी देवी ने 10 नवंबर 2009 को आशियाना के मुराइन खेड़ा स्थित तालाब में मिले शवे की शिनाख्त अपने बेटे गौरव उर्फ विक्की के रूप में की। पुलिस ने आननफानन में हत्या की प्राथमिकी दर्ज करके वकील को गिरफ्तार कर लिया।

सच सामने आने पर 12 जनवरी 2010 को दिलीप पांडेय, गौरव और इसकी प्रेमिका की गिरफ्तारी हुई। इन तीनों समेत आठ लोगों पर कार्रवाई के साथ फाइल बंद कर दी गई।
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