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Lucknow: रकम दोगुना करने का दावा कर चूरन वाले नोट थमाने वाला शातिर गिरफ्तार, अब तक सैकड़ों से की ठगी

Thu, 30 Nov 2023 01:15 PM IST
ishwar ashish माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ

सार

आठ साल से ठगी करने वाले शातिर को सरोजनीनगर पुलिस ने दबोच लिया है। वह रकम दोगुना करने का वादा करता था और फिर असली करेंसी के बदले नकली नोट पकड़ा देता था। आरोपी के पास से लााखों रुपये बरामद हुए हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : Social Media
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विस्तार
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रकम दोगुना करने का लालच देकर नकली नोट थमाकर ठगी करने वाले शातिर को बुधवार को सरोजनीनगर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के पास से 2.15 लाख रुपये की नकदी व एक एसयूवी बरामद हुई है। पुलिस की जांच में उसके तीन साथियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस उनकी तस्दीक कर रही है।

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डीसीपी साउथ विनीत जायसवाल ने बताया कि गोंडा निवासी अजीत मौर्या उर्फ रमेश को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसके गिरोह में सूरज, दीपक व राजेश नाम के शख्स शामिल हैं। सूरज सैरपुर इलाके का रहने वाला है, लेकिन वर्तमान में मुंबई में है। गिरोह के सदस्य लोगों को लोगों को रकम दोगुना करने का लालच देकर जाल में फंसाते हैं। जब रकम मिल जाती है तो दोगुना देने के नाम पर गड्डियों में ऊपर असली और बीच में चूरन वाले नोट लगाकर पकड़ा देते हैं और रफूचक्कर हो जाते हैं। आरोपी के पास से नकली नोट भी बरामद हुए हैं।

सैकड़ों को ठगा, ऐसे देते थे झांसा
एडीसीपी साउथ शशांक सिंह ने बताया कि अजीत के खिलाफ लखनऊ व गोंडा में करीब एक दर्जन आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह पिछले सात-आठ वर्षों से ठगी कर रहा है और सैकड़ों लोगों को शिकार बना चुका है। पूछताछ में अजीत ने बताया कि वह लोगों से कहता था कि हम जो रकम दोगुनी करके देंगे वह नेपाल से लाते हैं और यह बिल्कुल असली है। लोगों का विश्वास जीतने के लिए वह सौ सौ के असली नोट को नेपाल से लाया गया बताकर पकड़ा देते थे। जब बाजार में ये नोट आसानी से चल जाते थे तो उनको लगता था कि अजीत सही कह रहा है। इस पर वह लालच में आकर जब रकम दे देते थे तो वह चूरन वाले नोट गड्डियों में रखकर थमा देता था।
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इस तरह हुआ खुलासा
उन्नाव के असोहा थाना क्षेत्र के भाऊमऊ गांव निवासी धर्मेंद्र ने धोखाधड़ी की एक एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि सैरपुर निवासी सूरज ने अजीत से मिलवाया था, जिसने रकम दोगुना करने की बात कही थी। बीते रविवार को धर्मेंद्र ने ट्रांसपोर्ट नगर में तीन लाख रुपये अजीत को दिए थे, लेकिन वह रकम लेकर भाग निकला था। इसके बाद धर्मेंद्र ने एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोपी जिस एसयूवी से रकम लेने आया था, उसमें फर्जी नंबर प्लेट लगाई थी। इस मामले की जांच से पूरा खेल उजागर हुआ।

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