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‘तुझे थप्पड़-थप्पड़ मारेंगे, जूते का नंबर देख लो...'

Sun, 21 Jun 2015 09:23 PM IST
अनीता वर्मा/अमर उजाला, कानपुर।
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‘तुझे थप्पड़-थप्पड़ मारेंगे, ...बाहर निकलो, यहां छिप कर बैठे हो...जूते का नंबर देख लो... जो कह रहे हैं सुनो, वरना...।’ ये भाषा किसी सड़क छाप गुंडे-मवाली की नहीं बल्कि ‘जनता की सेवा’ का दंभ भरने वाले एक नेता जी की है।
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ये नेता हैं खुद को इंटक का प्रदेश अध्यक्ष बताने वाले आशीष पांडेय और वे अभद्रता कर रहे हैं लाल इमली के कार्यवाहक जीएम राजा मित्रा जैसे वरिष्ठ अधिकारी से।

हुआ यूं कि शुक्रवार को कुछ मजदूर नेताओं के साथ बिना किसी पूर्व सूचना के आशीष पांडेय और इंटक जिलाध्यक्ष डॉ. शारदा पांडेय लाल इमली के कार्यवाहक जीएम राजा मित्रा से वार्ता करने मिल मुख्यालय पहुंच गए। बिना अपॉइंटमेंट लिए मिलने से कार्यवाहक जीएम ने आपत्ति जताई तो नेता जी अभद्रता करने पर उतारू हो गए।
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उन्होंने मुख्यालय में प्रबंधक एडमिनिस्ट्रेशन एसके उपाध्याय के कक्ष में बैठे जीएम से आधा घंटे तक अभद्रता की। कई विधायकों और नेताओं का नाम लेकर आंदोलन करने की घुड़की दी।

इंटक के पदाधिकारी लाल इमली के कर्मचारियों को आठ महीने से वेतन न मिलने की समस्या लेकर करीब 11 बजे कार्यवाहक जीएम राजा मित्रा से मिलने लाल इमली पहुंचे। मित्रा मिल में नहीं थे, बाहर खड़े गार्ड ने पदाधिकारियों को बता दिया कि जीएम साहब मिल में नहीं हैं। इससे इंटक पदाधिकारी भड़क गए।

जूता उतारा नहीं था, पैर उठाकर बोला था

•क्या आपने लाल इमली जीएम राजा मित्रा को जूते से मारने की बात कही थी?
-जूता उतारा नहीं था। पैर उठाकर बोला था, यही मारूंगा। हाथ वहां (जूते तक) ले गए थे कि साइज देख लो, नंबर देख लो। अब हमारा कंप्रोमाइज हो गया। हमारी मित्रा से कोई दुश्मनी नहीं है।

•क्या आपने उनको हाथ दिखा थप्पड़ मारने के अंदाज में धमकाया था?
-हमने और शारदा ने उनको उनकी ही भाषा में समझाया था। शारदा ने कहा था कि वह इस्तीफा दे दें। हमने कहा है कि मुझे जेल भेजोगे, तो लौट कर फिर लड़ूंगा।

•क्या आपने उनसे ये कहा था कि बाहर निकलो तो बताएं?
-जीएम को मैंने और तमाम कर्मचारियों ने 10 बार फोन मिलाया था। पर जीएम ने फोन नहीं रिसीव किया। हम लोग एक घंटे धूप में खड़े रहे। उन्होंने गेट बंद करा दिया था। इसलिए गुस्सा आ गया। पर, अब कंप्रोमाइज हो गया है। आपके फोटोग्राफर भी वहीं थे। फोटो में सब कुछ है।

थप्पड़ दिखाते हुए शुरू कर दी अभद्रता

उन्होंने मिल गेट के बाहर नारेबाजी शुरू कर दी। मित्रा का पता लगाने के लिए एक साथी को मुख्यालय भेज दिया। पता चला कि मित्रा मुख्यालय में एसके उपाध्याय के पास बैठे हैं। इतना सुनते ही आशीष तीन-चार गाड़ियों से मुख्यालय पहुंच गए और धड़धड़ाते हुए उपाध्याय के कक्ष में घुस गए।

दोनों अफसर कुछ समझ पाते, इससे पहले ही शारदा पांडेय ने मित्रा को थप्पड़ दिखाते हुए अभद्रता शुरू कर दी। आशीष पांडेय भी भड़के और दोनों वरिष्ठ अफसरों को थप्पड़ दिखाकर मारने को धमकाया।

शारदा ने मित्रा का मोबाइल तक झपट लिया। मामला बढ़ता देख मुख्यालय के कर्मचारियों ने उन्हें शांत कराया। आशीष पांडेय का कहना है कि अनुमति लेना जरूरी नहीं था, वे मजदूरों के वेतन की समस्या लेकर मिलने गए थे पर जीएम मुख्यालय में छिप कर बैठ गए।

आशीष का कहना है कि बात मजदूरों की आएगी तो वह मारपीट करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। इस मौके पर मिल मजदूर नेता राजू ठाकुर, वंदना पांडेय, बड़े मिश्रा, आरती, गोपाल सिंह और तुकाराम गुरंग आदि मौजूद रहे।
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बात मजदूरों की है तो मैं आतंकवादी हूं

•क्या आप जैसे नेता को ऐसा करना शोभा देता है?
-मैंने उनसे कह दिया है कि बात मजदूरों की है तो मैं आतंकवादी हूं। मैं तुमसे बंगला जमीन लिखाने नहीं आता। घपले-घोटाले नहीं कराता। मजदूरों के हित में मैं कुछ भी कर सकता हूं। मैं व्यक्तिगत कोई काम कराने कभी नहीं जाता।

हमने उसे उसकी ही भाषा में समझाया। दो महीने पहले हमने आंदोलन किया था, तभी हमारे कार्यकर्ताओं ने इस जीएम की कुर्सी पलटाई थी। हम कहते रहे और वह चुप बैठा रहा, क्योंकि ये हमसे नहीं लड़ पाएंगे।

ये धूर्त हैं। पचासों करोड़ कमा रहे हैं। लाल इमली इन्हीं के कारण इस हाल में है। हमलोगों ने जीएम को फोन किया पर फोन नहीं उठाया। गेट बंद करा दिया। इसलिए गुस्सा ज्यादा आ गया।
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