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मां की डांट से दुखी छात्रा ने दुपट्टे से फांसी लगा दे दी जान

Thu, 22 Oct 2015 01:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मां की डांट से क्षुब्ध होकर ला-मार्टीनियर गर्ल्स कॉलेज में 11वीं कक्षा की छात्रा ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। हाईस्कूल में अच्छे नंबरों से पास होने की मन्नत पूरी करने के लिए बुधवार को ही उसके नाम की पूजा होनी थी। देवी मां को चढ़ाने के लिए 91 किलो देसी घी के लड्डू मंगाए गये थे।
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एसओ आशियाना संतोष तिवारी ने बताया कि सेक्टर-जे निवासी राकेश वर्मा की बेटी प्रज्ञा उर्फ रुनझुन ने दसवीं कक्षा में 91 प्रतिशत अंक हासिल किये थे। उसकी मां संचिता ने मन्नत मान रखी थी कि उनकी बेटी जितने प्रतिशत नंबर लाएगी, वह उतने ही किलो के लड्डू चढ़ाएंगी।

मंगलवार से ही पूजा की तैयारियां चल रही थी। शाम को लड्डू घर आये। इसे उसकी मां संचिता ने बेटी प्रज्ञा के कमरे में ही रखवा दिया। इसके बाद प्रज्ञा से दूसरे कमरे में सो जाने की बात कही और उसके कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। प्रज्ञा अपने ही कमरे में सोने के लिए जिद करने लगी। इसी बात को लेकर उसकी मां ने डांट लगा दी।
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मजबूरी में प्रज्ञा को दूसरे कमरे में सोने के लिये जाना पड़ा। सुबह काफी देर तक जब वह सोकर नहीं जागी तो मां ने उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद भी दरवाजा नहीं खुला। उन्होंने कुंडी तोड़कर कमरे का दरवाजा खोला। कमरे का दृश्य देख सभी के होश उड़ गये। प्रज्ञा कमरे में दुपट्टे और पंखे के सहारे फांसी के फंदे पर लटकी मिली। पुलिस को कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
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थोड़ी देर में मातम में बदल गईं खुशियां

स्टैंडर्ड कोचिंग के संचालक व रेलवे ठेकेदार राकेश वर्मा के घर में दो दिन से ही इस पूजा की तैयारियां चल रही थीं। घर में खुशी और जश्न का माहौल था। सभी नौ दिन का व्रत थे और बुधवार को बड़ी पूजा होनी थी। सुबह जैसे ही पता चला कि प्रज्ञा ने खुदकुशी कर ली है, तो वहां मातम पसर गया। किसी के भी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। रो-रोकर मां का बुरा हाल है।

काश, मान ली होती बेटी की बात
मां को अब इस बात का पछतावा है कि उसने बेटी प्रज्ञा की बात नहीं मानी। पूजा का सामान और लड्डू को उन्होंने उसके कमरे में इसलिये रखवाया, जिससे वह सुरक्षित रहें। इसीलिये उन्होंने प्रज्ञा को उस कमरे में सोने से मना किया। वह नहीं जानती थीं कि होनहार बेटी की खुशियां बांटने के लिये मंगाये गए यही लड्डू अब उसकी जान के दुश्मन बन जाएंगे।

भीड़ में दीदी को तलाशता रहा मासूम
प्रज्ञा की मौत की खबर सुनते ही मोहल्ले से लेकर सहेलियों तक का उसके घर पर तांता लग गया। उसे अंतिम बार देखने और परिवार के साथ दुख में शरीक हुए लोगों की आंखों में आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। छोटा भाई अरनव अपनी प्यारी दीदी को तलाशता रहा और आंखों में आंसू भरे वह दीदी को इधर-उधर ढूंढता रहा।
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