रात एक बजे अयान को लेकर वे लोग नेत्र रोग विभाग पहुंचे। वहां फोन से जूनियर रेजीडेंट को बुलाया गया, जिसने कहा कि उसे टांका लगाना नहीं आता। फिर प्लास्टिक सर्जरी विभाग ले जाने की बात कही गई, वहां कोई नहीं मिला। फिर गार्ड ने ट्रॉमा सेंटर ले जाने की बात कही।
रात 2.30 बजे सिर्फ मरहम पट्टी, फिर खरीद कर लगवाया इंजेक्शन
अयान को घरवाले 2.30 बजे लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। यहां जख्मों पर टांके लगाकर मरहम पट्टी की गई। और आंखों के आसपास जख्मों के लिए नेत्र विभाग भेजा गया। रात तीन बजे वहां से बिना इलाज लौट आए। थकहार कर एंटी रेबीज इंजेक्शन खरीद कर लगवाया। वासु सफाई कर्मचारी हैं। इंजेक्शन का पैसा उन्होंने पड़ोसियों की मदद से जुटाया।
केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार का कहना है कि बच्चे को ट्रॉमा सेंटर लाया गया था। उसको पूरा उपचार देकर ड्रेसिंग कराकर भेजा गया है। 24 घंटे का समय होता है, वैक्सीन खत्म हो गई थी, इसलिए अगले दिन आने को कहा गया।