पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी ने बताया कि बिल्डिंग निर्माण में 260 आइटम लगते हैं। किसी एक इंजीनियर के लिए इनकी जांच करना मुमकिन नहीं है। इसलिए इस काम को विशेषज्ञों की एक कमेटी ही कर सकती है। हकीकत में पूर्व मुख्यमंत्री के आवास में राज्य संपत्ति विभाग से स्वीकृत नक्शे से कहीं ज्यादा काम कराया गया है।
रिकॉर्ड में सिर्फ ग्राउंड फ्लोर ही स्वीकृत है, जबकि फर्स्ट फ्लोर पर भी कमरों का निर्माण कराया गया। वेटिंग हॉल का भी निर्माण बिना सक्षम स्तर से स्वीकृति कर कराया गया। राज्य संपत्ति विभाग के सूत्रों के मुताबिक, अब यह निर्णय सरकार को करना है कि अतिरिक्त निर्माण कार्य में हुए नुकसान को शासकीय क्षति माना जाए या नहीं।